राष्ट्रपति मुर्मु ने जैसलमेर में प्रचंड हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान

Fri 27-Feb-2026,04:16 PM IST +05:30

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राष्ट्रपति मुर्मु ने जैसलमेर में प्रचंड हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान President-Murmu-Flies-ICH-Prachand-Jaisalmer
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जैसलमेर में स्वदेशी एलसीएच ‘प्रचंड’ में उड़ान भरकर भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और वायुसेना की क्षमता का प्रदर्शन किया।

  • 25 मिनट के मिशन में टैंक लक्ष्य पर सटीक हमला और ऐतिहासिक स्थलों के ऊपर उड़ान ने हेलीकॉप्टर की आक्रामक शक्ति दर्शाई।

Rajasthan / Jaisalmer :

भारत की रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी सैन्य तकनीक पर गर्व का एक और ऐतिहासिक क्षण तब देखने को मिला, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राजस्थान के जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरी। लगभग 25 मिनट तक चले इस विशेष मिशन ने न केवल भारतीय वायुसेना के आत्मविश्वास को प्रदर्शित किया, बल्कि देश की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता को भी रेखांकित किया। यह उड़ान भारतीय सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

राष्ट्रपति ने दो विमानों के एलसीएच फॉर्मेशन मिशन में हिस्सा लिया। पहले हेलीकॉप्टर में वे ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ सवार थीं, जबकि दूसरे हेलीकॉप्टर में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और ग्रुप कैप्टन ए महेंद्र मौजूद थे। उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर ने जैसलमेर के ऐतिहासिक स्थलों, गडिसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी। मिशन के दौरान एक टैंक लक्ष्य पर सटीक हमला भी किया गया, जिससे प्रचंड की आक्रामक क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

राष्ट्रपति ने इस अनुभव को बेहद गौरवपूर्ण बताया। आगंतुक पुस्तिका में लिखी अपनी टिप्पणी में उन्होंने कहा कि स्वदेशी रूप से विकसित ‘प्रचंड’ में उड़ान भरना उनके लिए समृद्ध अनुभव रहा और इससे राष्ट्र की रक्षा क्षमता पर उनका विश्वास और मजबूत हुआ। उन्होंने भारतीय वायुसेना और जैसलमेर वायुसेना स्टेशन की पूरी टीम को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

यह उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति इससे पहले 2023 में सुखोई 30 एमकेआई और 2025 में राफेल लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। इससे स्पष्ट है कि वे सशस्त्र बलों की क्षमताओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने और प्रोत्साहित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

शाम को राष्ट्रपति जैसलमेर में आयोजित वायु शक्ति अभ्यास का भी अवलोकन करेंगी, जहां भारतीय वायुसेना अपनी रणनीतिक और तकनीकी ताकत का प्रदर्शन करेगी। यह पूरा कार्यक्रम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वदेशी सैन्य तकनीक की मजबूती का प्रतीक बनकर उभरा है।