रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में NSUI का प्रदर्शन: कुलगुरु से इस्तीफे की मांग
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Rani Durgavati University NSUI Protest
परीक्षा परिणाम और डिग्री में देरी पर विरोध.
कुलगुरु से इस्तीफे की मांग.
पीएम-उषा योजना के उपयोग पर सवाल.
Jabalpur / जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को उस समय माहौल गरमा गया, जब भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के बैनर तले छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष सचिन रजक के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र और कार्यकर्ता कुलगुरु कार्यालय के सामने एकत्रित हुए और अपनी विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक मांगों को लेकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन उस समय और तीखा हो गया, जब कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा कार्यालय से बाहर निकलकर अपनी गाड़ी में बैठने लगे। कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोक लिया और बातचीत की मांग की। बताया जाता है कि कुलगुरु पहले वहां से निकलने का प्रयास करते रहे, लेकिन छात्र उनके वाहन के सामने खड़े हो गए। स्थिति तब और असामान्य हो गई जब कुलगुरु पैदल ही परिसर से बाहर जाने लगे, परंतु प्रदर्शनकारी उनका पीछा करते रहे।
एक बार बातचीत के बाद जब कुलगुरु दोबारा जाने लगे तो वे कर्मचारियों की बाइक पर बैठकर निकलने का प्रयास करने लगे। इस दौरान भी कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की। नाराज होकर कुलगुरु बाइक से उतर गए और छात्रों के सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। छात्रों ने नैतिक आधार पर कुलगुरु से इस्तीफे की मांग की। अंततः कुलगुरु अपने कार्यालय में लौट गए, जहां तक कार्यकर्ता उनका पीछा करते हुए पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासनिक भवन परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी और छात्र एकत्रित हो गए।
जिलाध्यक्ष सचिन रजक ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुका है। उन्होंने कहा कि एमबीए चतुर्थ सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम आठ महीने से लंबित है। सेमेस्टर परीक्षाएं समय पर आयोजित नहीं हो रहीं, जिससे पूरा अकादमिक कैलेंडर प्रभावित हो गया है। इसका सीधा असर छात्रों के उच्च शिक्षा में प्रवेश, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों पर पड़ रहा है।
एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि एमबीए, एलएलबी, बीएससी, बीसीए जैसे कई पाठ्यक्रमों के परिणाम महीनों तक घोषित नहीं किए गए। परीक्षा समय-सारिणी में बार-बार बदलाव, मूल्यांकन में त्रुटियां, अंक प्रविष्टि में गड़बड़ियां और पुनर्मूल्यांकन में अत्यधिक देरी ने छात्रों को मानसिक तनाव में डाल दिया है। परिणामों में देरी के कारण डिग्री वितरण भी प्रभावित हो रहा है। संगठन का दावा है कि 1500 से अधिक डिग्रियां लंबित हैं, जबकि लगभग 1800 छात्रों ने अर्जेंट डिग्री के लिए शुल्क जमा किया है, फिर भी उन्हें दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
इसके अलावा पीएम-उषा योजना के तहत प्राप्त धनराशि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए। संगठन का आरोप है कि तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए जरूरी कंप्यूटर लैब, सॉफ्टवेयर और आधारभूत सुविधाएं विकसित नहीं की गईं, जबकि इसके लिए बजट उपलब्ध था।
एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही परिणाम घोषित नहीं किए गए, अकादमिक कैलेंडर नियमित नहीं हुआ और छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि जब तक कुलगुरु इस्तीफा नहीं देते, विरोध जारी रहेगा।
प्रदर्शन में राष्ट्रीय सचिव करन तामसेतवार, प्रदेश उपाध्यक्ष अमित मिश्रा सहित बड़ी संख्या में छात्र और कार्यकर्ता मौजूद रहे। विश्वविद्यालय परिसर में दिनभर गहमागहमी का माहौल बना रहा और अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी है।