मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद फैला संक्रमण: 12 मरीजों की आंख निकालनी पड़ी, स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का ओटी किया सील
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Gorakhpur Hospital Case
मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 12 मरीजों की आंख निकाली गई.
अस्पताल का ओटी सील, स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी.
परिजनों ने लापरवाही का आरोप, कार्रवाई की मांग.
Gorakhpur / जिले के सिकरीगंज क्षेत्र के जद्दूपट्टी स्थित न्यू राजेश हाईटेक अस्पताल में हुए मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद फैले गंभीर संक्रमण ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस लापरवाही का खामियाजा मरीजों को अपनी आंखों की रोशनी गंवाकर चुकाना पड़ा है। अब तक 12 मरीजों की संक्रमित आंख निकालनी पड़ी है, जबकि पांच अन्य मरीजों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (ओटी) को सील कर दिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, एक फरवरी को न्यू राजेश हाईटेक अस्पताल में करीब 30 मरीजों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद कई मरीजों को आंख में तेज दर्द, सूजन और मवाद आने की शिकायत होने लगी। मरीजों के परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के चार से छह घंटे के भीतर ही संक्रमण के लक्षण सामने आने लगे, जिससे मरीजों की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। कुछ मरीजों को उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं भी हुईं, जिससे परिजन घबरा गए। स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल प्रशासन ने कुछ मरीजों को एंबुलेंस के जरिए बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया। इनमें पांच मरीजों को लखनऊ, पांच को दिल्ली और एक मरीज को वाराणसी भेजा गया।
बेलघाट निवासी रणजीत गौड़ के परिजन प्रदीप ने बताया कि ऑपरेशन के बाद घर पहुंचते ही उनकी आंख से मवाद आने लगा और दर्द असहनीय हो गया। जब अस्पताल को इसकी सूचना दी गई तो एंबुलेंस भेजकर उन्हें वापस बुलाया गया, लेकिन संक्रमण तेजी से फैल चुका था। बाद में उन्हें वाराणसी रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने आंख बचाने की कोशिश की, लेकिन संक्रमण काबू में नहीं आ सका। इसी तरह बनकटा निवासी दीनानाथ लोहार के पुत्र कृष्ण मुरारी ने बताया कि उनके पिता की हालत भी ऑपरेशन के बाद अचानक बिगड़ गई। उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया, जहां संक्रमण गंभीर होने के कारण डॉक्टरों को उनकी आंख निकालनी पड़ी।
अब तक जिन 12 मरीजों की आंख निकाली जा चुकी है, उनमें देवराजी देवी, अर्जुन सिंह, शंकरावती, जयराम, शेखा देवी, दीनानाथ, रामदरश, मीरा देवी, बहाउद्दीन, रणजीत, हसीबुन्निशा और रामसरन शामिल हैं। इन सभी मरीजों का इलाज दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी के विभिन्न अस्पतालों में किया गया। कुछ मरीज इलाज के बाद घर लौट चुके हैं, जबकि कई का अभी भी फॉलोअप चल रहा है। जिन पांच मरीजों की हालत गंभीर है, उनके इलाज पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल जांच शुरू कर दी है। चार फरवरी को मामला सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने जांच समिति गठित कर 10 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने भी मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उरुवा के प्रभारी डॉ. जेपी तिवारी को अस्पताल भेजकर ऑपरेशन थिएटर को बंद करा दिया गया है, ताकि संक्रमण के स्रोत का पता लगाया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि संक्रमण किन कारणों से फैला और इसमें किस स्तर पर लापरवाही हुई। संभावना जताई जा रही है कि ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल किए गए उपकरणों की सही तरीके से सफाई और संक्रमण नियंत्रण के मानकों का पालन नहीं किया गया। यदि जांच में अस्पताल की लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोग निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। मरीजों के परिजन दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है और प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।