Lal Bahadur Shastri Death Anniversary: जय जवान जय किसान के नारा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि
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लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि और श्रद्धांजलि.
‘जय जवान, जय किसान’ का आदर्श.
1965 के युद्ध में भारत की विजय में योगदान.
Delhi / 11 जनवरी को भारत अपने दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि मनाता है। ‘जय जवान, जय किसान’ के उद्घोषक, शास्त्री जी का निधन 11 जनवरी 1966 को हुआ था। उनके योगदान और नेतृत्व को याद करते हुए देशभर के नेता और नागरिक भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि शास्त्री जी ने संकट के समय देश को स्वावलंबन और सुरक्षा का सुंदर समन्वय दिखाया। अमित शाह ने लिखा कि सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले गुदड़ी के लाल शास्त्री ने 1965 के युद्ध में भारत को विजय दिलाने के लिए दृढ़ संकल्प और मजबूत नेतृत्व प्रदान किया। उनका संपूर्ण जीवन आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने शास्त्री जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर राष्ट्र निर्माण तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रियंका गांधी ने लिखा कि ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देकर शास्त्री जी ने देश को सुरक्षा और समृद्धि का मार्ग दिखाया। उनकी सादगी, परिश्रम, विनम्रता और राष्ट्रसेवा की भावना हर पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि शास्त्री जी का दिया गया नारा आज भी देश के आत्मविश्वास, साहस और श्रम का प्रतीक है। कठिन परिस्थितियों में उनका कुशल नेतृत्व किसानों के सम्मान और राष्ट्र की ताकत को नई मजबूती देता रहा।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शास्त्री जी के साहसी नेतृत्व और उनके किए गए सुधारों को याद किया। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी ने चुनौतीपूर्ण समय में देश का मार्गदर्शन किया और कृषि, पोषण और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाले अहम कदम उठाए। उनका नारा सैनिकों और किसानों दोनों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बीजेपी ने भी शास्त्री जी को याद करते हुए सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित की। पोस्ट में कहा गया कि ‘जय जवान, जय किसान’ के उद्घोषक, भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी की स्मृति में शत्-शत् नमन।
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 1904 में उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1964 से 1966 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा दी। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद 9 जून 1964 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद संभाला। अपने लगभग 18 महीने के कार्यकाल के दौरान शास्त्री जी ने देश को आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से निपटने का मार्ग दिखाया।
शास्त्री जी के प्रधानमंत्री रहते हुए भारत ने 1965 की जंग में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। ताशकंद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्ध समाप्ति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद 11 जनवरी 1966 की रात उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। उनके जीवन की विशेषताएँ – सादगी, ईमानदारी और दूरदर्शी नेतृत्व – आज भी भारतीय राजनीति और समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। वे ऐसे नेता थे जो जनता की भाषा को समझते थे और जिन्होंने देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाया।
लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, साहस और राष्ट्रभक्ति की भावना उन्हें भारतीय इतिहास के अमर नेता बनाती है। उनका जीवन, उनके विचार और उनके आदर्श आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। उनके द्वारा दिया गया ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा भारत के सैनिकों और किसानों दोनों के प्रति सम्मान और समर्थन का प्रतीक बन गया है।