दहेज ठुकराया: राजावत परिवार ने 25 लाख और सोना लौटाया

Mon 27-Apr-2026,04:45 PM IST +05:30

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दहेज ठुकराया: राजावत परिवार ने 25 लाख और सोना लौटाया MP-Wedding-Dowry-Rejected-Rajawat-Family
  • मध्य प्रदेश के बंगरेड में राजावत परिवार ने तिलक समारोह में 25 लाख रुपये और सोना लौटाकर दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत संदेश दिया।

  • दूल्हे के पिता ने कहा विवाह कोई सौदा नहीं, बहू ही लक्ष्मी है, इस पहल की समाज और सोशल मीडिया पर सराहना हो रही।

  • परिवार पहले से सामाजिक कार्यों में सक्रिय, पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा में योगदान, यह विवाह अब दहेज विरोधी रोल मॉडल बना।

Madhya Pradesh / :

बंगरेड (मध्य प्रदेश)/ जहां एक ओर शादियां अक्सर दहेज और फिजूलखर्ची के लिए जानी जाती हैं, वहीं ग्राम बंगरेड के राजावत परिवार ने समाज को एक नई दिशा देने का काम किया है। 26 अप्रैल को आयोजित तिलक समारोह में दूल्हे के परिवार ने वधु पक्ष द्वारा दिए गए लाखों रुपये और सोने के आभूषण ससम्मान लौटा दिए। इस पहल ने “बेटी ही लक्ष्मी है” के संदेश को मजबूत करते हुए समाज में एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है।

यह तिलक समारोह Adarshdeep Singh Rajawat और वधु पक्ष के बीच संपन्न हुआ, जिसमें वधु पक्ष ने परंपरा के अनुसार 25 लाख रुपये नकद और 15 तोला सोना भेंट किया। लेकिन दूल्हे के पिता Jitendra Singh Rajawat ने इस दहेज को लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने केवल शगुन के तौर पर एक अंगूठी स्वीकार की और बाकी राशि व आभूषण वापस लौटा दिए।

जितेंद्र सिंह राजावत, जो एक सामाजिक कार्यकर्ता और क्षत्रिय समाज से जुड़े पदाधिकारी भी हैं, ने कहा कि विवाह कोई आर्थिक सौदा नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र बंधन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें बहू के रूप में लक्ष्मी स्वरूप बेटी चाहिए, न कि दहेज का धन।

इस निर्णय की हर स्तर पर सराहना हो रही है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय समाज तक, लोग इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश मान रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब जितेंद्र सिंह राजावत अपने सामाजिक कार्यों के कारण चर्चा में आए हैं। वर्ष 2015 से वे पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं और हजारों पौधे लगा चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने कई जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा का जिम्मा उठाया है और कई बेटियों के विवाह में सहयोग किया है।

इस घटना ने दहेज प्रथा के खिलाफ चल रही मुहिम को नई ताकत दी है। बंगरेड का यह विवाह अब एक रोल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो समाज में बदलाव की प्रेरणा बन सकता है।