छत्तीसगढ़ में सरेंडर नक्सलियों का वेरिफिकेशन शुरू, फर्जी दावों पर रोक
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छत्तीसगढ़ सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की, ताकि फर्जी मामलों पर रोक लगे और पुनर्वास योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।
पुलिस अधीक्षकों को विशेष अधिकार दिए गए, जो नक्सलियों के रिकॉर्ड, पृष्ठभूमि और गतिविधियों की जांच कर पूरी जानकारी अपडेट करेंगे।
पिछले तीन वर्षों में 2700 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिनमें कई बड़े इनामी और महिला सदस्य भी शामिल रहे हैं।
Bastar/ छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता के बाद अब सरकार ने एक अहम प्रशासनिक कदम उठाया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन प्रक्रिया शुरू की जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला पारदर्शिता बढ़ाने और पुनर्वास योजनाओं का सही लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचाने के उद्देश्य से लिया गया है।
इस नई व्यवस्था के तहत नक्सल प्रभावित जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को विशेष अधिकार दिए गए हैं। वे आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पूरी जानकारी एकत्र करेंगे, उनका रिकॉर्ड तैयार करेंगे और नियमित रूप से अपडेट भी करेंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी व्यक्ति गलत तरीके से आत्मसमर्पण का दावा कर सरकारी योजनाओं का लाभ न उठा सके।
मार्च 2026 में राज्य को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद यह कदम और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले राज्य में 2700 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। सरकार अब इन सभी मामलों की गहन जांच कर रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और फर्जी मामलों पर रोक लग सके।
यह निर्णय गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुरूप लिया गया है। वर्ष 2013 और 2022 में जारी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि नक्सली किसी भी अधिकृत अधिकारी के सामने आत्मसमर्पण कर सकते हैं। अब उसी नीति के तहत जिला स्तर पर सत्यापन की जिम्मेदारी तय की गई है।
नई प्रक्रिया के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पिछले जीवन और गतिविधियों की विस्तृत जांच की जाएगी। उनके आपराधिक रिकॉर्ड, संगठन से जुड़ाव और अन्य संबंधित जानकारियों का मिलान विभिन्न एजेंसियों से किया जाएगा। सभी विवरण निर्धारित फॉर्मेट में दर्ज किए जाएंगे, जिससे भविष्य में भी इनका उपयोग किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम फर्जी आत्मसमर्पण के मामलों पर रोक लगाने में कारगर साबित होगा। पहले ऐसे आरोप सामने आए थे कि कुछ लोग बिना नक्सली गतिविधियों से जुड़े हुए भी लाभ लेने की कोशिश करते हैं। अब सख्त सत्यापन प्रक्रिया से इस तरह की गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा।
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक 2,714 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें अधिकांश बस्तर क्षेत्र से हैं। इनमें कई बड़े इनामी नक्सली और महिला सदस्य भी शामिल हैं। यह संकेत देता है कि सरकार की नीति और सुरक्षा बलों की कार्रवाई का असर जमीन पर दिख रहा है।