पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस और लद्दाख के एलजी कविंदर गुप्ता ने दिया इस्तीफा
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West Bengal Politics
सीवी आनंद बोस और कविंदर गुप्ता ने दिया इस्तीफा.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा इस्तीफा.
ममता बनर्जी ने उठाए सवाल.
Kolkata / देश की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता ने अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया है। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ब्रिगेडियर (डॉ.) बी. डी. मिश्रा (सेवानिवृत्त) का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद 14 जुलाई 2025 को कविंदर गुप्ता को लद्दाख का लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया था। कविंदर गुप्ता जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं।
कविंदर गुप्ता इससे पहले जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। महबूबा मुफ्ती के मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने राज्य के डिप्टी सीएम के रूप में कार्य किया था। इसके अलावा वे जम्मू नगर निगम के मेयर और जम्मू-कश्मीर विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं।
दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके कार्यालय के अधिकारी ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि राज्यपाल ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया है। हालांकि अभी तक उनके इस्तीफे के पीछे की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है।
सी. वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि इस खबर से वे आश्चर्यचकित और चिंतित हैं। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें अभी तक यह जानकारी नहीं है कि राज्यपाल ने किन कारणों से इस्तीफा दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल के रूप में आर. एन. रवि की नियुक्ति के बारे में उनसे कोई सलाह नहीं ली गई। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दबाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ममता बनर्जी ने कहा कि अगर ऐसा हुआ है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और संघीय ढांचे के लिए ठीक संकेत नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह सहकारी संघवाद (कोऑपरेटिव फेडरलिज्म) के सिद्धांतों का सम्मान करे और राज्यों से जुड़े मामलों में एकतरफा फैसले लेने से बचे।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दोनों वरिष्ठ पदों से एक साथ इस्तीफे आने से यह मामला और भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन इस्तीफों के पीछे असली वजह क्या है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की ओर से इस मामले पर अधिक स्पष्टता सामने आ सकती है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि इन इस्तीफों के बाद संबंधित पदों पर आगे किसे जिम्मेदारी दी जाएगी और इससे राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा।