राष्ट्रपति मुर्मु ने जमशेदपुर में ओल चिकी लिपि और संथाली भाषा की ऐतिहासिक भूमिका बताई

Mon 29-Dec-2025,06:33 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

राष्ट्रपति मुर्मु ने जमशेदपुर में ओल चिकी लिपि और संथाली भाषा की ऐतिहासिक भूमिका बताई president murmu ol chiki santhali jamshedpur
  • संथाली भाषा में संविधान जारी होने से मातृभाषा में अधिकारों और कर्तव्यों की समझ और गहरी होगी।

  • पर्यावरण संरक्षण, मातृभाषा शिक्षा और साहित्यिक अनुवाद को जनजातीय विकास से जोड़ा गया।

Jharkhand / Jamshedpur :

Jamshedpur/  राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 29 दिसंबर 2025 को झारखंड के जमशेदपुर में आयोजित 22वें पारसी महा और ओल चिकी के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में भाग लिया और संथाल समुदाय की भाषा, साहित्य व संस्कृति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। राष्ट्रपति ने कहा कि संथाल समाज की विशिष्ट पहचान उसकी संथाली भाषा और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी है।

उन्होंने बताया कि एक शताब्दी पूर्व तक संथाली भाषा के लिए कोई स्वतंत्र लिपि नहीं थी और विभिन्न लिपियों में इसके शब्दों का सही उच्चारण संभव नहीं हो पाता था। वर्ष 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु द्वारा विकसित ओल चिकी लिपि ने इस कमी को दूर किया और आज यह संथाल पहचान का सशक्त प्रतीक बन चुकी है।

राष्ट्रपति ने हाल ही में ओल चिकी लिपि में संथाली भाषा में संविधान जारी किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे संथाली भाषी लोग अपनी मातृभाषा में संविधान को समझ सकेंगे। उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा को संथाल समुदाय के समग्र विकास के लिए आवश्यक बताया।

पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि संथाल और अन्य जनजातीय समुदायों की जीवनशैली प्रकृति के साथ संतुलन का श्रेष्ठ उदाहरण है। उन्होंने लेखकों और भाषा प्रेमियों से संथाली साहित्य के प्रचार, अनुवाद और साहित्यिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का आह्वान किया।