जैव विविधता संरक्षण: NBA ने राज्यों में 45 लाख का लाभ साझा किया
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राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण ने लाभ-साझाकरण के तहत 45.05 लाख रुपये का भुगतान कर समुदायों और किसानों को सशक्त किया है।
ABS व्यवस्था जैव विविधता संरक्षण, आजीविका सुधार और जैव-अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।
Delhi/ जैव विविधता संरक्षण और जैविक संसाधनों से मिलने वाले लाभों के निष्पक्ष वितरण की दिशा में राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण (NBA) ने एक अहम कदम उठाया है। प्राधिकरण ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जैव विविधता प्रबंधन समितियों और किसानों को 45.05 लाख रुपये की लाभ-साझाकरण राशि वितरित की है। यह पहल न केवल समुदायों की आजीविका को सशक्त करती है, बल्कि जैव विविधता संरक्षण को भी प्रोत्साहित करती है।
राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण ने राज्य जैव-विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव-विविधता परिषदों के माध्यम से 45.05 लाख रुपये का लाभ-साझाकरण भुगतान किया है। इस वितरण से देश के 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यरत 90 से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMC) को सीधा लाभ मिला है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के 15 लाल चंदन किसानों को भी इस योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है।
लाभ पाने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, असम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली एनसीटी और लद्दाख शामिल हैं। ये बीएमसी गांवों, शहरी स्थानीय निकायों, मैंग्रोव क्षेत्रों और औद्योगिक क्षेत्रों जैसे विविध पारिस्थितिक परिवेशों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
यह लाभ-साझाकरण राशि विभिन्न जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से उत्पन्न हुई है। इनमें कीट, मिट्टी और जल में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों से लेकर खेती की गई लाल चंदन जैसी जैविक संपदाएं शामिल हैं। इन संसाधनों का उपयोग कई प्रकार के उत्पादों के निर्माण में किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जैव विविधता वैज्ञानिक नवाचार और जैव-अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।
पहुंच और लाभ-साझाकरण (ABS) व्यवस्था के तहत कंपनियों द्वारा अर्जित व्यावसायिक लाभ का एक हिस्सा स्थानीय समुदायों को लौटाया जाता है। इससे समुदायों की आय में वृद्धि होती है और उन्हें जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
एनबीए ने हाल के वर्षों में नियमों को सरल बनाकर पारदर्शिता और व्यापार सुगमता को बढ़ावा दिया है। साथ ही, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और जन जैव-विविधता रजिस्टरों के दस्तावेजीकरण के जरिए जमीनी स्तर पर सहभागितात्मक संरक्षण को मजबूत किया जा रहा है। इन प्रयासों के चलते अब तक कुल ABS भुगतान 145 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है।