नमक को लेकर फैला सच और संदेह: आयोडीन, सेंधा नमक और सेहत की वास्तविक तस्वीर

Sun 01-Feb-2026,01:48 AM IST +05:30

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नमक को लेकर फैला सच और संदेह: आयोडीन, सेंधा नमक और सेहत की वास्तविक तस्वीर Salt types and health concerns
  • आयोडीन थायरॉयड और मानसिक विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्व है.

  • सेंधा नमक और सामान्य नमक का मुख्य घटक लगभग समान होता है.

  • नमक का अधिक सेवन, प्रकार से ज्यादा नुकसानदेह है.

Maharashtra / Nagpur :

Nagpur / भारत में नमक केवल भोजन का स्वाद बढ़ाने वाला तत्व नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा एक संवेदनशील विषय बन चुका है। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर आयोडीन युक्त नमक को लेकर कई तरह के दावे तेजी से वायरल हुए हैं। कहीं इसे गंभीर बीमारियों की जड़ बताया जा रहा है, तो कहीं सेंधा नमक को हर रोग की रामबाण औषधि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इन विरोधाभासी दावों के बीच आम उपभोक्ता असमंजस में है कि आखिर रोज़मर्रा की थाली में कौन सा नमक सही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आयोडीन शरीर के लिए एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है। इसकी जरूरत थायरॉयड ग्रंथि के सही कामकाज के लिए होती है। आयोडीन की कमी से घेंघा, बच्चों में मानसिक विकास की कमी और गर्भवती महिलाओं में जटिलताएं हो सकती हैं। इन्हीं कारणों से सरकार ने दशकों पहले आयोडीन युक्त नमक को बढ़ावा दिया था, ताकि व्यापक आबादी में आयोडीन की कमी को रोका जा सके।

हालांकि, यह भी सच है कि किसी भी पोषक तत्व की अधिक मात्रा शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जरूरत से ज्यादा आयोडीन लेने से थायरॉयड संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, लेकिन ऐसा आमतौर पर केवल नमक के सेवन से नहीं होता। इसके लिए लंबे समय तक अत्यधिक आयोडीन का सेवन जिम्मेदार होता है। इसलिए यह कहना कि आयोडीन युक्त नमक अपने आप में जहर है, वैज्ञानिक दृष्टि से सही नहीं माना जाता।

दूसरी ओर, आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में सेंधा नमक को हल्का, पाचन के लिए अनुकूल और त्रिदोष संतुलन में सहायक बताया गया है। व्रत और उपवास में सेंधा नमक के उपयोग की परंपरा भी इसी सोच से जुड़ी है। लेकिन आधुनिक पोषण विज्ञान के अनुसार सेंधा नमक और सामान्य नमक, दोनों का मुख्य घटक सोडियम क्लोराइड ही होता है। फर्क केवल इतना है कि सेंधा नमक में कुछ सूक्ष्म खनिज प्राकृतिक रूप से मौजूद हो सकते हैं, लेकिन उनकी मात्रा इतनी अधिक नहीं होती कि वे अकेले किसी गंभीर पोषण कमी को पूरा कर सकें।

उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और किडनी से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी नमक पर सवाल उठते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन बीमारियों का मुख्य कारण नमक का प्रकार नहीं, बल्कि उसकी अधिक मात्रा है। चाहे आयोडीन युक्त नमक हो या सेंधा नमक, दोनों का अधिक सेवन समान रूप से नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए सीमित मात्रा में नमक का उपयोग ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया जाता है कि कई देशों ने आयोडीन युक्त नमक पर प्रतिबंध लगा दिया है। विशेषज्ञ इन दावों को भ्रामक बताते हैं। कुछ देशों में आयोडीनकरण वैकल्पिक या लक्षित समूहों तक सीमित है, लेकिन व्यापक स्तर पर इसे पूरी तरह प्रतिबंधित किए जाने के प्रमाण नहीं मिलते। दरअसल, हर देश अपनी आबादी की पोषण जरूरतों के अनुसार नीतियां तय करता है।

पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या नमक को लेकर नहीं, बल्कि अधूरी और गलत जानकारी को लेकर है। बिना प्रमाण के किसी एक नमक को पूरी तरह छोड़ देना या दूसरे को चमत्कारी मान लेना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। संतुलित आहार, विविध खाद्य पदार्थों का सेवन और डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह ही सही मार्गदर्शन दे सकती है।

अंततः यह कहा जा सकता है कि नमक चाहे कोई भी हो, उसका सीमित और समझदारी से किया गया उपयोग ही स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। आयोडीन न तो जहर है और न ही सेंधा नमक हर बीमारी का समाधान। सही जानकारी, संतुलन और जागरूकता ही इस बहस का सबसे व्यावहारिक निष्कर्ष है।