रादुविवि कार्यपरिषद बैठक में हंगामा, एबीवीपी विरोध के बीच बैठक भंग
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Rani Durgawati University News
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद बैठक एबीवीपी के विरोध और आंतरिक विवाद के चलते बीच में ही भंग हुई।
छात्रों ने डिग्री, मार्कशीट, परीक्षा आयोजन और परिणामों में देरी को लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
कार्यपरिषद सदस्यों के वॉकआउट ने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक अराजकता और शैक्षणिक गिरावट उजागर की।
जबलपुर, 20 फरवरी 2026, शिक्षा के क्षेत्र में प्रशासनिक अव्यवस्था और छात्र असंतोष की तस्वीर उस समय खुलकर सामने आ गई, जब रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर की कार्यपरिषद बैठक हंगामे और विरोध के बीच भंग हो गई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की 19 सूत्रीय मांगों के निराकरण न होने से आक्रोशित छात्रों के प्रदर्शन और आंतरिक असहमति के चलते कार्यपरिषद सदस्य बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गए। यह घटना विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जबलपुर द्वारा जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। विद्यार्थी परिषद का आरोप है कि लंबे समय से विश्वविद्यालय में छात्रों को बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। डिग्री, अंकसूची और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के लिए विद्यार्थियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
एबीवीपी का कहना है कि परीक्षाओं का आयोजन समय पर नहीं हो पा रहा, वहीं परीक्षा परिणामों की घोषणा में भी अनावश्यक देरी हो रही है। इससे न केवल छात्रों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है, बल्कि भविष्य की योजनाएं भी अधर में लटक रही हैं। परिषद ने प्रशासनिक समन्वय की कमी और निर्णय प्रक्रिया में विलंब को विश्वविद्यालय की बदहाली का प्रमुख कारण बताया।
बैठक के दौरान स्थिति तब और बिगड़ गई, जब ऑनलाइन सेंटर प्रभारी आर.के. गुप्ता और कार्यपरिषद सदस्य वेदप्रकाश तिवारी के बीच तीखी बहस हो गई। बहस का स्तर ‘तू-तू, मैं-मैं’ तक पहुंच गया, जिससे बैठक का माहौल पूरी तरह अव्यवस्थित हो गया। इसी बीच UICSA विभाग की विभागाध्यक्ष ने भी कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और तकनीकी संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि छात्र और अभिभावक हमसे निराश हैं, लेकिन प्रशासन सहयोग नहीं करता।
तनावपूर्ण माहौल के बीच कई कार्यपरिषद सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर दिया। कुलगुरु द्वारा सदस्यों को रोकने का प्रयास भी किया गया, लेकिन सदस्यों का कहना था कि वे विश्वविद्यालय में व्याप्त अराजकता और प्रशासनिक असंतुलन को अब और सहन नहीं कर सकते। उनका आरोप है कि शैक्षणिक गुणवत्ता लगातार गिर रही है और नीतिगत स्तर पर गंभीर लापरवाही हो रही है।
एबीवीपी के केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य माखन शर्मा ने कहा कि कृषि, बीसीए, एमसीए जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रयोगशालाओं और संसाधनों की भारी कमी है। इससे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है। वहीं महानगर मंत्री आर्यन पुंज ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील हो चुका है और उनके सवालों का कोई ठोस उत्तर नहीं देता।
आज की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक और प्रशासनिक सुधार की तत्काल आवश्यकता है। कार्यपरिषद जैसी सर्वोच्च नीति-निर्धारण इकाई की बैठक का इस तरह हंगामे में भंग होना न केवल चिंताजनक है, बल्कि विश्वविद्यालय की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य माखन शर्मा, महानगर मंत्री आर्यन पुंज , प्रांत सह मंत्री अनमोल सोनकर , ऐश्वर्य सोनकर,शोभित मिश्रा , अक्षत ताम्रकार,भास्कर पटेल ,प्रफुल तिवारी ,दिव्यांक पचौरी , लखन मांझी , आशुतोष पटेल ,आयुष बारी,कृष्ण ग्वालवंश , यश पटेल , आयुष पटेल ,अंकित सिंह ,पुष्कर शुक्ला ,सोम यादव ,आदि पावर,प्रक्ष सिसोदिया,अनिकेत श्रीवास्तव ,राज नेमा,आभास दुबे आदि उपस्थित रहे ।