बागेश्वर धाम कन्या विवाह महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय पहचान
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बागेश्वर धाम में 302 बेटियों का सामूहिक विवाह, अंतरराष्ट्रीय अतिथियों की मौजूदगी से आयोजन को वैश्विक पहचान मिली।
प्रत्येक जोड़े को उपहार, धार्मिक ग्रंथ और 30 हजार रुपये की एफडी, आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर।
छतरपुर/ छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में आयोजित 10 दिवसीय सप्तम कन्या विवाह महोत्सव ने इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय पहचान बना ली है। पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के मार्गदर्शन में आयोजित इस भव्य समारोह में अमेरिका सहित आठ देशों के राजदूत, देशभर के संत-महात्मा और अनेक विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। 13 से 15 फरवरी तक चलने वाले वैदिक कार्यक्रमों के साथ 302 बेटियों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया जाएगा, जिससे यह आयोजन सामाजिक समरसता और सेवा का प्रतीक बन गया है।
बागेश्वर धाम का यह कन्या विवाह महोत्सव अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक उत्थान का बड़ा अभियान बन चुका है। तीन दिवसीय मुख्य कार्यक्रमों की शुरुआत 13 फरवरी को हल्दी रस्म से होगी। 14 फरवरी को मेहंदी समारोह आयोजित किया जाएगा और 15 फरवरी को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सामूहिक विवाह संस्कार संपन्न होंगे। दूर-दराज से आने वाली कन्याओं को पहले ही बुला लिया गया है ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।
हर जोड़े को धार्मिक ग्रंथ, भगवान श्री बालमुकुंद और बालाजी सरकार के विग्रह, रामचरितमानस, वस्त्र, आभूषण, घरेलू सामग्री, एलईडी टीवी, सिलाई मशीन, गैस चूल्हा, फर्नीचर सहित अनेक उपहार दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त प्रत्येक जोड़े के संयुक्त नाम से 30 हजार रुपये की एफडी भी कराई जाएगी, जिससे उनके भविष्य को आर्थिक आधार मिल सके।
15 फरवरी को दूल्हे घोड़ी पर सवार होकर गाजे-बाजे के साथ विवाह स्थल पहुंचेंगे। 50-50 जोड़ों के समूह में वरमाला के बाद वैदिक रीति-रिवाज से विवाह संपन्न होंगे। घराती और बारातियों के लिए विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई है। किन्नर समाज की विशेष सहभागिता इस आयोजन को और विशिष्ट बनाएगी।
महोत्सव के लिए 1648 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से जांच के बाद 302 बेटियों का चयन किया गया। इनमें अनाथ, दिव्यांग, पितृहीन और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियां शामिल हैं। मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार, झारखंड, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और नेपाल से प्रतिभागी इसमें शामिल हो रहे हैं।
मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास देवाचार्य महाराज और असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने आयोजन की सराहना की। 13 फरवरी को आरोग्य आस्था केंद्र के साथ वैदिक गुरुकुलम का शुभारंभ भी होगा। इससे पूर्व सवा लाख हनुमान चालीसा एवं सुंदरकांड पाठ में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि चढ़ोतरी और समाज से मिले सहयोग से यह आयोजन संभव हो पाया है और अन्य संस्थाओं को भी ऐसे सामाजिक कार्यों के लिए आगे आना चाहिए।