इंदौर में जात्रा–2026: जनजातीय कला और संस्कृति का महोत्सव

Fri 20-Feb-2026,01:09 PM IST +05:30

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इंदौर में जात्रा–2026: जनजातीय कला और संस्कृति का महोत्सव Jatra-2026-Indore-Tribal-Festival
  • इंदौर के गांधी हॉल में 20-22 फरवरी को जात्रा-2026, जनजातीय कला, नृत्य, संगीत और व्यंजनों का भव्य आयोजन।

  • आयोजन शहर और आदिवासी अंचलों के बीच सांस्कृतिक सेतु बनकर नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ेगा।

Madhya Pradesh / Indore :

Indore/ Indore के ऐतिहासिक Gandhi Hall परिसर में 20 से 22 फरवरी 2026 तक ‘जात्रा–2026’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय उत्सव का उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति-आधारित जीवनशैली को नई पीढ़ी से जोड़ना है। आयोजन समिति ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह महोत्सव शहर और आदिवासी अंचलों के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य करेगा।

इस वर्ष जात्रा की थीम ‘पारंपरिक रंग, सुर और स्वाद’ रखी गई है। आयोजन में प्रदेश के विभिन्न आदिवासी क्षेत्रों से कलाकार पारंपरिक नृत्य और लोक प्रस्तुतियां देंगे। भगोरिया और मांदल गीतों की गूंज पूरे परिसर को जीवंत बनाएगी। भगोरिया पर्व पर आधारित विशेष फोटो प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।

धार, झाबुआ और अलीराजपुर अंचल की प्रसिद्ध पिथोरा कला इस बार विशेष आकर्षण होगी। ट्राइबल फाउंडेशन द्वारा स्थापित पिथोरा आर्ट गैलरी में 25 से अधिक चयनित पेंटिंग्स प्रदर्शित की जाएंगी। इन चित्रों में आदिवासी जीवन, आस्था, प्रकृति और उत्सवों का जीवंत चित्रण देखने को मिलेगा।

समिति के अध्यक्ष देवकीनंदन तिवारी ने कहा कि पिथोरा चित्रकला आदिवासी समाज की आत्मा का प्रतिबिंब है, जिसमें प्रकृति और जीवन के गहरे संबंध को दर्शाया जाता है। कार्यक्रम संयोजक गिरीश चव्हाण ने बताया कि जात्रा–2026 केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन मूल्यों को समझने का अवसर है।

मेले में जनजातीय हस्तशिल्प प्रदर्शनी और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। आगंतुक हस्तनिर्मित शिल्पकृतियां खरीद सकेंगे और पारंपरिक स्वाद का अनुभव करेंगे। गांधी हॉल परिसर को मालवा-निमाड़ की पारंपरिक शैली में सजाया जाएगा, जिससे जनजातीय सौंदर्यबोध झलकेगा।

आयोजन से पूर्व 18 फरवरी को विधि-विधान से भूमि पूजन कर कार्यक्रम की सफलता की कामना की गई। जात्रा–2026 इंदौरवासियों को जनजातीय संस्कृति और पर्यावरण-संवेदनशील जीवनशैली को करीब से जानने का अनूठा अवसर प्रदान करेगा।