खाली प्लेटफॉर्म पर भी आउटर सिग्नल पर क्यों रुकती है ट्रेन?
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ट्रेन के आउटर सिग्नल पर रुकने के पीछे सुरक्षा, प्लेटफॉर्म आवंटन और ट्रैक कनेक्टिविटी से जुड़ी तकनीकी और संचालन संबंधी वजहें होती हैं।
प्लेटफॉर्म खाली दिखने के बावजूद निर्धारित रूट, सिग्नल सेटिंग और स्टेशन शेड्यूल के कारण ट्रेन को इंतजार करना पड़ सकता है।
Nagpur/ यात्रा के दौरान अक्सर ऐसा दृश्य देखने को मिलता है जब ट्रेन का समय हो चुका होता है, अनाउंसमेंट भी हो जाता है, प्लेटफॉर्म खाली नजर आता है, फिर भी ट्रेन स्टेशन के बाहर यानी आउटर सिग्नल पर खड़ी रहती है। यात्री हैरान होते हैं कि आखिर खाली प्लेटफॉर्म होने के बावजूद ट्रेन को अंदर क्यों नहीं लाया जा रहा। कई बार पूछताछ काउंटर से भी यही जवाब मिलता है कि “ट्रेन आउटर पर खड़ी है।” इसके पीछे लापरवाही नहीं, बल्कि एक तय और सुरक्षित रेलवे संचालन प्रणाली काम करती है।
आउटर सिग्नल क्या होता है?
स्टेशन से कुछ दूरी पहले लगाया गया सिग्नल आउटर सिग्नल कहलाता है। जब तक स्टेशन मास्टर या कंट्रोल सिस्टम से ट्रेन को प्लेटफॉर्म पर प्रवेश की अनुमति नहीं मिलती, तब तक ट्रेन इसी सिग्नल पर रोकी जाती है। यह पूरी तरह से एक मानक सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है, जिससे स्टेशन के अंदर ट्रैफिक का संतुलन बना रहता है।
हर ट्रेन के लिए तय होता है प्लेटफॉर्म
भारतीय रेलवे में अधिकांश ट्रेनों के प्लेटफॉर्म पहले से निर्धारित होते हैं। यह निर्धारण टाइम टेबल, रूट कनेक्टिविटी, आगे की लाइन की उपलब्धता और स्टेशन की ऑपरेशनल योजना के आधार पर किया जाता है। यदि तय प्लेटफॉर्म पर पहले से कोई ट्रेन खड़ी हो या देरी से पहुंची हो, तो अगली ट्रेन को आउटर पर इंतजार करना पड़ता है, भले ही दूसरे प्लेटफॉर्म खाली दिख रहे हों।
प्लेटफॉर्म खाली है, फिर भी ट्रेन क्यों नहीं आती?
1. ट्रैक कनेक्टिविटी:
हर प्लेटफॉर्म हर दिशा से आने वाली ट्रेन से सीधे नहीं जुड़ा होता। जिस लाइन से ट्रेन आ रही है, वह संभव है केवल उसी निर्धारित प्लेटफॉर्म से जुड़ी हो।
2. सिग्नल और पॉइंट्स सेटिंग:
प्लेटफॉर्म बदलने के लिए ट्रैक के पॉइंट्स बदलने, रूट रीसेट करने और सिग्नल क्लियर करने की प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। इसमें समय के साथ सुरक्षा जांच भी शामिल होती है।
3. स्टेशन संचालन पर प्रभाव:
स्टेशन पर एक साथ कई गतिविधियां चलती रहती हैं-जैसे शंटिंग, मालगाड़ी मूवमेंट, क्रॉसिंग और अन्य ट्रेनों का आगमन-प्रस्थान। एक ट्रेन का प्लेटफॉर्म बदलना पूरे शेड्यूल को प्रभावित कर सकता है।
सुरक्षा सर्वोपरि
रेलवे नेटवर्क एक जटिल और अत्यंत संवेदनशील प्रणाली है। यहां छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए कई बार यात्रियों को जो प्लेटफॉर्म खाली दिखता है, वह संचालन की दृष्टि से उपलब्ध नहीं होता। आउटर पर ट्रेन रोकना रेलवे की प्राथमिकता-सुरक्षा और सुचारू संचालन-का हिस्सा है।