बसंत पंचमी 23 जनवरी विशेष: विद्या, परंपरा और उत्सव से सराबोर देश
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23 जनवरी को बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा, शिक्षा और ज्ञान के महत्व को लेकर देशभर में विशेष धार्मिक आयोजन।
पीले वस्त्र, पारंपरिक व्यंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ बसंत पंचमी ने ऋतु परिवर्तन का संदेश दिया।
विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों में सरस्वती वंदना और विद्यारंभ संस्कार का विशेष महत्व रहा।
Delhi / आज 23 जनवरी को देशभर में बसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। बसंत पंचमी को ऋतु परिवर्तन का प्रतीक भी माना जाता है, जब शीत ऋतु धीरे-धीरे विदा लेती है और प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है।
इस अवसर पर मंदिरों, शिक्षण संस्थानों और घरों में मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की गई। विद्यार्थियों ने विद्या, बुद्धि और रचनात्मकता की कामना करते हुए देवी से आशीर्वाद लिया। कई स्थानों पर सरस्वती वंदना, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। स्कूलों और कॉलेजों में पीले वस्त्र पहनने और पीले पुष्प अर्पित करने की परंपरा का विशेष महत्व रहा।
बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का खास महत्व होता है, जो ऊर्जा, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं और केसरिया, बूंदी के लड्डू, खीर जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं। खेतों में सरसों की पीली फसल खिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष उल्लास देखने को मिलता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी को कई स्थानों पर बच्चों की विद्यारंभ संस्कार की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन अक्षर ज्ञान की शुरुआत को शुभ माना जाता है। साथ ही, यह पर्व भारतीय संस्कृति में शिक्षा, कला और संगीत के महत्व को रेखांकित करता है।
देश के विभिन्न हिस्सों में बसंत पंचमी के साथ स्थानीय परंपराएं भी जुड़ी हैं। कहीं पतंगबाजी का उत्साह दिखा, तो कहीं सांस्कृतिक मेलों का आयोजन हुआ। कुल मिलाकर 23 जनवरी की बसंत पंचमी ने देशभर में सकारात्मक ऊर्जा, आस्था और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया।