संत का बड़ा बयान: शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोकना गौहत्या के समान अपराध

Sat 24-Jan-2026,03:28 PM IST +05:30

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संत का बड़ा बयान: शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोकना गौहत्या के समान अपराध Saint-Sparks-Debate,-Says-Stopping-Shankaracharya-from-Ganga-Snan-Equals-Gohatya
  • संत ने कहा, शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोकना सनातन परंपरा और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।

  • बयान के बाद संत समाज और धार्मिक संगठनों में समर्थन और विरोध की प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।

  • मुद्दा धार्मिक आस्था, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों के संतुलन पर नई बहस को जन्म दे रहा है।

Delhi / New Delhi :

Delhi /  हरिद्वार/प्रयागराज। एक संत के बयान ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। संत ने कहा है कि यदि किसी शंकराचार्य को गंगा स्नान करने से रोका जाता है, तो यह कृत्य “गौहत्या के समान” अपराध माना जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद धार्मिक संगठनों, संत समाज और आम लोगों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

संत ने अपने वक्तव्य में कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि सनातन परंपरा की जीवनरेखा हैं। शंकराचार्य जैसे आध्यात्मिक पद पर आसीन व्यक्ति को गंगा स्नान से रोकना सनातन संस्कृति और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे कृत्य से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था आहत होती है।

संत के अनुसार, शंकराचार्य न केवल धार्मिक गुरु होते हैं, बल्कि सनातन धर्म की परंपराओं के संरक्षक भी माने जाते हैं। ऐसे में उनके धार्मिक अनुष्ठानों पर रोक लगाना सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जैसे गौहत्या को समाज में सबसे बड़ा अपराध माना जाता है, उसी तरह गंगा स्नान से रोकना भी उतना ही गंभीर विषय है।

इस बयान के बाद कई धार्मिक संगठनों ने संत के समर्थन में बयान जारी किए हैं। उनका कहना है कि किसी भी संत, महात्मा या शंकराचार्य को धार्मिक कर्मकांड करने से रोकना असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। वहीं कुछ सामाजिक वर्गों ने इस बयान को अतिशयोक्तिपूर्ण बताते हुए संयम बरतने की अपील की है।

प्रशासनिक स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हालात पर नजर रखी जा रही है। जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में धार्मिक स्वतंत्रता, परंपरा और कानून के बीच संतुलन को लेकर बड़ी बहस का रूप ले सकता है।

फिलहाल संत समाज में इस बयान को लेकर समर्थन और विरोध—दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं जारी हैं, जिससे यह साफ है कि मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहेगा।