गुरु पूर्णिमा 2025: गोरखनाथ मंदिर में CM योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूजन कर दी शुभकामनाएं
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गोरखनाथ मंदिर में योगी आदित्यनाथ ने किया गुरु पूजन।
नाथपंथ की परंपरा के अनुसार गुरु पूर्णिमा अनुष्ठान।
वैदिक विधियों से पूजन और महाआरती संपन्न।
Gorakhpur / गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गुरुवार प्रातः काल गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का पारंपरिक रूप से विशिष्ट पूजन किया। यह पूजन नाथपंथ की शाश्वत परंपराओं के अनुरूप वैदिक विधियों के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर उन्होंने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ, दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ, योगिराज बाबा गंभीरनाथ समेत सभी पूर्वाचार्यों और नाथ संप्रदाय के महापुरुषों का श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ पूजन किया।
प्रातः 5 बजे से ही गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा का विशेष अनुष्ठान प्रारंभ हो गया था। वैदिक मंत्रोच्चारों के बीच पूजा की प्रक्रिया आरंभ हुई और सामूहिक महाआरती के साथ उसका समापन हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पवित्र अवसर पर देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि गुरु का स्थान हमारे जीवन में सर्वोच्च है और उनके मार्गदर्शन से ही हम लोक कल्याण के पथ पर अग्रसर हो सकते हैं।
हालांकि गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जब भी गोरखनाथ मंदिर में रहते हैं, वे नियमित रूप से गुरु गोरखनाथ व अन्य नाथ गुरुजनों का दर्शन-पूजन करते हैं, लेकिन गुरु पूर्णिमा के दिन इस परंपरा का विशेष महत्व होता है। इसी क्रम में उन्होंने सबसे पहले नाथपंथ के आदिगुरु भगवान गोरखनाथ की प्रतिमा के समक्ष हाजिरी लगाई और पूजन किया। तत्पश्चात मंदिर परिसर में स्थित सभी देव विग्रहों का विधिपूर्वक पूजन किया।
इसके बाद वे बाबा गंभीरनाथ, अपने दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधियों पर पहुंचे और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन किया। उन्होंने श्रद्धा पूर्वक सभी गुरुओं का स्मरण कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
नाथपंथ की परंपरा के अनुसार, गुरु गोरखनाथ को 'रोट' का महाप्रसाद अर्पित किया गया। यह विशेष प्रसाद पूजा का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। पूजन-अर्चन की पूर्णता के बाद मंदिर में परंपरागत महाआरती हुई और भक्तों ने सभी गुरुओं के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
गोरखनाथ मंदिर का यह आध्यात्मिक वातावरण, वैदिक ध्वनियों की गूंज और गुरु परंपरा के प्रति अगाध श्रद्धा का दृश्य, गुरु पूर्णिमा को और भी दिव्य एवं प्रेरणादायी बना गया।