ब्रेन डेड के बाद भी जीवनदाता बने रघु पासवान, अंगदान से बचाईं 5 जिंदगियां
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ब्रेन डेड घोषित होने के बाद रघु पासवान के अंगदान से पांच गंभीर मरीजों को मिला नया जीवन।
परिजनों के साहसिक निर्णय और डॉक्टरों की तत्परता से सफल रहा अंग प्रत्यारोपण।
रघु की कहानी ने समाज में अंगदान को लेकर नई जागरूकता और प्रेरणा पैदा की।
Delhi / ब्रेन डेड घोषित होने के बाद भी रघु पासवान ने पांच जिंदगियों को नई सांस देकर सच्चे अर्थों में ‘जीवनदाता’ बनने का उदाहरण पेश किया। अंगदान के माध्यम से रघु पासवान ने यह साबित कर दिया कि मृत्यु के बाद भी इंसान दूसरों के जीवन में उजाला भर सकता है। उनके इस निर्णय ने न केवल पांच मरीजों को नया जीवन दिया, बल्कि समाज को भी एक मजबूत संदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार, सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल रघु पासवान को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इस कठिन क्षण में परिजनों ने साहसिक और मानवीय निर्णय लेते हुए अंगदान की सहमति दी। मेडिकल टीम की तत्परता और परिजनों की सहमति से अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
रघु पासवान के हृदय, यकृत, दोनों किडनी और आंखों का दान किया गया, जिससे देश के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती पांच गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर अंग उपलब्ध होने से मरीजों की जान बचाई जा सकी, जो लंबे समय से प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में थे।
परिजनों ने बताया कि रघु हमेशा दूसरों की मदद करने में विश्वास रखते थे। अंगदान का निर्णय उनके विचारों और मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम बना। उन्होंने कहा कि गम के इस क्षण में यह संतोष है कि रघु किसी और के जीवन में जीवित रहेंगे।
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विभाग ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि देश में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। एक ब्रेन डेड व्यक्ति कई जिंदगियों को बचा सकता है, लेकिन जानकारी और सहमति के अभाव में कई अवसर चूक जाते हैं।
रघु पासवान की यह कहानी समाज के लिए प्रेरणा है, जो यह संदेश देती है कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि जीवन देने का माध्यम भी बन सकती है।