एयरपोर्ट पर महंगे भोजन-पानी पर राघव चड्ढा का सवाल, यात्रियों को राहत की मांग
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राघव चड्ढा ने एयरपोर्ट पर महंगे भोजन और पानी को लेकर यात्रियों के शोषण का मुद्दा संसद में उठाया।
सांसद ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से एयरपोर्ट पर किफायती खाने-पीने के नियम तय करने की मांग की।
यात्रियों और सोशल मीडिया यूजर्स ने भी एयरपोर्ट पर अत्यधिक कीमतों पर नाराजगी जाहिर की।
नई दिल्ली /देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों से खाने-पीने की ऊंची कीमतें वसूले जाने का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने संसद और सार्वजनिक मंचों पर एयरपोर्ट पर मिलने वाले महंगे भोजन और पानी को लेकर कड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि हवाई यात्रा पहले ही आम आदमी के लिए महंगी होती जा रही है, ऊपर से एयरपोर्ट के अंदर सामान्य पानी और खाने की चीजें भी कई गुना दाम पर बेची जा रही हैं।
राघव चड्ढा ने कहा कि यात्रियों के पास एयरपोर्ट परिसर में सीमित विकल्प होते हैं और इसी मजबूरी का फायदा उठाकर दुकानदार अत्यधिक कीमत वसूलते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जहां बाहर 20 रुपये में मिलने वाली पानी की बोतल एयरपोर्ट पर 60 से 80 रुपये तक बिकती है, वहीं साधारण भोजन भी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाता है।
सांसद ने सवाल उठाया कि क्या हवाई अड्डे केवल कॉरपोरेट मुनाफे के केंद्र बनकर रह गए हैं, जहां यात्रियों के हितों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से मांग की कि एयरपोर्ट पर किफायती भोजन और पानी उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
इस मुद्दे पर यात्रियों की प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है। कई यात्रियों का कहना है कि लंबी उड़ानों या लेओवर के दौरान महंगे भोजन से जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। सोशल मीडिया पर भी लोग एयरपोर्ट की कीमतों को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और सरकारी हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
राघव चड्ढा ने सुझाव दिया कि हर एयरपोर्ट पर जन औषधि केंद्रों की तरह जन सुविधा फूड आउटलेट होने चाहिए, जहां तय दरों पर भोजन और पानी उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि अगर रेलवे स्टेशनों पर सस्ता और नियंत्रित भोजन मिल सकता है, तो एयरपोर्ट पर ऐसा क्यों नहीं हो सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है, तो हवाई यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है। अब देखना होगा कि राघव चड्ढा द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं।