सांस्कृतिक कार्यक्रम में लड़कियों को विशेष पोशाक पहनाकर डांस, अभिभावकों ने जताई आपत्ति
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Parents-Protest-After-Girls-Forced-to-Wear-Specific-Costume-for-Dance-Program
सांस्कृतिक कार्यक्रम में लड़कियों को विशेष पोशाक पहनाने पर अभिभावकों ने आपत्ति जताई, सहमति के बिना डांस कराए जाने का आरोप लगाया।
अभिभावकों का कहना है कि पोशाक और प्रस्तुति के बारे में पहले सूचना नहीं दी गई, बच्चों की सुविधा को नजरअंदाज किया गया।
मामले पर प्रशासन ने संज्ञान लिया और आयोजकों से रिपोर्ट मांगी, बच्चों की सहमति व सुरक्षा पर जांच की तैयारी।
Delhi / उत्तर प्रदेश के एक जिले में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान उस समय विवाद शुरू हो गया, जब कुछ लड़कियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध विशेष पोशाक पहनाकर डांस करवाए जाने का मामला सामने आया। अभिभावकों का आरोप है कि कार्यक्रम आयोजकों ने बच्चों से पहले अनुमति नहीं ली और न ही कार्यक्रम से पहले परिधान के बारे में परिवारों को सूचित किया। इस वजह से कई अभिभावकों ने आपत्ति जताई और स्कूल/आयोजन समिति के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।
घटना के बाद अभिभावकों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों में बच्चों की सहमति और सुविधा को सबसे पहले प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कुछ अभिभावकों का कहना है कि लड़कियों को अचानक एक तय पोशाक पहनने के लिए मजबूर किया गया, जबकि वे इससे असहज थीं। अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि आयोजकों ने पोशाक को लेकर सवाल पूछने पर भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया, जिससे असंतोष और बढ़ गया।
विवाद बढ़ने के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और स्कूल/कार्यक्रम समिति से रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध किसी गतिविधि में शामिल किया गया है, तो यह गंभीर मामला है और इसकी जांच आवश्यक है। बच्चों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में है। कई उपयोगकर्ताओं ने अभिभावकों का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों की सहमति, सहजता और सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि आयोजकों को पारदर्शिता और संवाद बनाए रखना चाहिए था, ताकि ऐसी स्थिति उत्पन्न ही न हो।
फिलहाल स्कूल और आयोजन समिति ने कहा है कि वे मामले की आंतरिक जांच कर रहे हैं और अगर किसी स्तर पर गलती हुई हो तो उसे सुधारा जाएगा। अभिभावक उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रम बच्चों के हित को ध्यान में रखकर ही आयोजित किए जाएंगे।