इलाज में खर्च हुआ सारा पैसा, बेटी को खुद उठानी पड़ी मां की अर्थी—व्यवस्था पर सवाल
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मां के इलाज में हुआ सारा खर्च खत्म होने पर बेटी को मजबूरन अपनी मां की अर्थी खुद उठानी पड़ी, घटना ने भावुक कर दिया।
आर्थिक तंगी के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था मुश्किल हुई, स्थानीय लोगों की सीमित मदद से पूरा हुआ संस्कार।
मामला सामने आते ही प्रशासन सक्रिय हुआ, परिवार को सहायता देने और लापरवाही की जांच करने की बात कही।
Delhi / उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में एक मार्मिक घटना सामने आई है, जिसने प्रशासन और सामाजिक व्यवस्थाओं पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक युवती को अपनी मां का अंतिम संस्कार करने के लिए खुद ही अर्थी उठानी पड़ी, क्योंकि मां के इलाज में खर्च हो चुके पैसों के कारण परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था। बेटी ने कहा कि उसने मां के इलाज के लिए अपनी सारी बचत, उधार और जेवर तक बेच दिए, लेकिन अंत में मां को बचाया नहीं जा सका।
परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो गई थी कि अंतिम संस्कार के लिए भी आवश्यक सामान जुटाना मुश्किल हो गया। युवती ने बताया कि आसपास के कुछ लोगों ने प्रारंभिक मदद की, लेकिन पर्याप्त सहयोग न मिल पाने के कारण उसे मजबूरन अकेले ही अर्थी उठानी पड़ी। यह दृश्य देखने वालों की आंखें नम हो गईं और क्षेत्र में इस घटना को लेकर गहरी संवेदना दिखाई दी।
स्थानीय सामाजिक संगठनों और प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं कि गरीब और संकटग्रस्त परिवारों तक अंतिम समय में भी सहायता क्यों नहीं पहुंच पाती। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से अंतिम संस्कार सहायता की कई योजनाएँ हैं, परंतु कागजी प्रक्रियाएँ और विलंबित मंजूरी के कारण जरूरतमंदों को समय पर मदद नहीं मिल पाती।
घटना सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने की बात कही। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसी स्थितियाँ भविष्य में न बनें। वहीं युवती ने कहा कि उसका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि यह बताना है कि जब कोई परिवार संकट में हो, तो समाज और व्यवस्था दोनों को उसके साथ खड़ा होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में है। लोग कह रहे हैं कि यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उस दर्द की झलक है जिससे कई गरीब परिवार रोज गुजरते हैं।