दिल्ली में एक महीने में 807 लोग गायब, रोज 54 लापता—सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
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दिल्ली में एक महीने में 807 लोग लापता, औसतन हर दिन 54 लोग गायब हो रहे, सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल।
पुलिस विशेष टीमों के साथ सीसीटीवी, मोबाइल ट्रैकिंग और डिजिटल तकनीक से लापता लोगों की तलाश में जुटी, कई मामले संदिग्ध।
विशेषज्ञों ने मानसिक तनाव, सामाजिक असंतुलन और साइबर प्रभाव को बढ़ती घटनाओं का कारण बताया, सुरक्षा बढ़ाने की सलाह।
Delhi / दिल्ली में लोगों के लापता होने के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। राजधानी में महज एक महीने के भीतर 807 लोग गायब हो गए हैं, यानी औसतन हर दिन 54 लोग लापता हो रहे हैं। यह आंकड़ा न केवल चौंकाने वाला है बल्कि सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, लापता व्यक्तियों में बड़ी संख्या महिलाओं, युवाओं और नाबालिगों की है।
पुलिस का कहना है कि कई मामले पारिवारिक विवाद, आर्थिक तनाव, घर छोड़कर जाने या गलत संगति में फँसने से जुड़े होते हैं, लेकिन कुछ घटनाएँ संदिग्ध भी मानी जा रही हैं। शहर के कई इलाकों—रोहिणी, द्वारका, दक्षिणी दिल्ली और शाहदरा—में रोजाना लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीमें गठित की हैं जो सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर तलाश अभियान चला रही हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी इन मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पुलिस परिवारों के साथ मिलकर लापता व्यक्तियों की जानकारी समाज में प्रसारित कर रही है ताकि त्वरित सुराग मिल सके। इसके बावजूद लगातार बढ़ती संख्या ने शहर के नागरिकों में भय और असुरक्षा की भावना को जन्म दिया है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि महानगरों में बढ़ती भीड़, तनावपूर्ण जीवन और सामाजिक असंतुलन लापता होने की घटनाओं के पीछे बड़े कारण हैं। इसके साथ ही साइबर प्रभाव, ऑनलाइन ठगी और गलत संपर्क भी कई मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को निगरानी बढ़ाने, बच्चों व महिलाओं की सुरक्षा मजबूत करने और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम चलाने की जरूरत है।
इसी बीच, दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि घर में तनाव, विवाद या अन्य सामाजिक समस्याएँ हों तो परिवार या पुलिस हेल्पलाइन की सहायता लें और तुरंत शिकायत दर्ज कराएँ। प्रशासन का दावा है कि कई मामलों में लापता व्यक्तियों को समय रहते खोज लिया जाता है, लेकिन बढ़ती संख्या लगातार परीक्षा ले रही है।
यह स्थिति साफ दर्शाती है कि दिल्ली में लापता होने की घटनाएँ एक गंभीर सामाजिक और सुरक्षा चुनौती बन चुकी हैं, जिसके लिए तत्काल और प्रभावी कदम की आवश्यकता है।