छत्तीसगढ़ में नाइट शिफ्ट नियम बदले, कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त प्रावधान

Fri 02-Jan-2026,02:08 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

छत्तीसगढ़ में नाइट शिफ्ट नियम बदले, कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त प्रावधान Chhattisgarh-Night-Shift-Women-Safety-Rules
  • छत्तीसगढ़ सरकार ने नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षा गार्ड, वाहन सुविधा और पुलिस सत्यापन को अनिवार्य किया।

  • नाइट शिफ्ट में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए श्रम कानूनों में बड़ा संशोधन लागू।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में कार्यरत महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिला कर्मकारों से जुड़े नियमों में व्यापक संशोधन किया है, जिससे कार्यस्थल पर सुरक्षा, सुविधा और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित किया जा सके। श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियमों में किए गए इस संशोधन का सीधा लाभ निजी और संगठित क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को मिलेगा।

नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी महिला कर्मकार को रात 9 बजे से सुबह 6 बजे के बीच कार्य पर लगाया जाता है, तो नियोजक को उनके निवास से कार्यस्थल तक सुरक्षित आवागमन की समुचित व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए सुरक्षा गार्ड के साथ वाहन की सुविधा अनिवार्य की गई है। वाहन चालक, सुरक्षा गार्ड और वाहन का पुलिस सत्यापन कराना भी जरूरी होगा, साथ ही सभी विवरण नियोजक को सुरक्षित रखने होंगे।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि नाइट शिफ्ट में महिलाओं की तैनाती उनकी लिखित सहमति के बिना नहीं की जा सकेगी। इसके लिए प्ररूप-6 में सहमति लेना अनिवार्य किया गया है और रात्रि पाली में न्यूनतम तीन महिला कर्मियों की उपस्थिति आवश्यक होगी। इसके अलावा, महिला कर्मियों की नाइट शिफ्ट से संबंधित जानकारी प्ररूप-7 में श्रम विभाग के वेब पोर्टल पर पहले से अपलोड करनी होगी।

कार्यस्थल पर महिला कर्मियों के लिए पृथक शौचालय, मूत्रालय, पेयजल और विश्राम कक्ष की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। शौचालयों में अंदर से बंद होने वाली सुरक्षा सिटकनी भी जरूरी होगी। कार्यस्थल पर पर्याप्त रोशनी, हवा, स्वास्थ्यकर वातावरण और जहां आवश्यक हो वहां बैठने की सुविधा देना भी नियोजक की जिम्मेदारी होगी।

इसके साथ ही, लैंगिक उत्पीड़न निवारण अधिनियम 2013 के सभी प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य किया गया है। कार्यस्थल पर स्थानीय पुलिस थाना, पुलिस कंट्रोल रूम और महिला सहायता केंद्र के संपर्क नंबर प्रदर्शित करने होंगे। महिला कर्मियों की शिकायतों के लिए शिकायत पेटी भी अनिवार्य की गई है। यह निर्णय महिलाओं के सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त कार्य वातावरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।