MP में गेहूं खरीदी तेज, किसानों को 2625 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा
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मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी अभियान तेज, पहले दिन 45 केंद्रों पर 1616 क्विंटल उपज की खरीद की गई।
किसानों को MSP 2585 रुपये और 40 रुपये बोनस मिलाकर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान दिया जाएगा।
Indore/ मध्य प्रदेश में रबी सीजन के तहत गेहूं उपार्जन अभियान अब पूरी तरह गति पकड़ चुका है। राज्य के इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभागों में पहले दिन की खरीदी के बाद दूसरे दिन भी केंद्रों पर किसानों की भीड़ देखी जा रही है। उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाएं बेहतर बनाए जाने के कारण खरीदी प्रक्रिया सुचारु रूप से आगे बढ़ रही है।
खरीदी अभियान के पहले दिन प्रदेश के 45 उपार्जन केंद्रों पर कुल 1616 क्विंटल गेहूं की खरीदारी की गई। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ेगा, क्योंकि अधिक किसान अपनी उपज बेचने के लिए केंद्रों तक पहुंच रहे हैं।
राज्य सरकार ने इस बार किसानों के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य (MSP) और बोनस मिलाकर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान तय किया है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 2585 रुपये प्रति क्विंटल MSP के साथ राज्य सरकार की ओर से 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस शामिल है। इस निर्णय से किसानों को आर्थिक रूप से राहत मिलने की उम्मीद है।
इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए किसानों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। अब तक प्रदेश में रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। यह बढ़ती भागीदारी किसानों के विश्वास और सरकारी योजनाओं के प्रभाव को दर्शाती है।
इसके साथ ही 97 हजार से अधिक किसानों ने अपनी फसल बेचने के लिए स्लॉट बुक कर लिया है। यह बुकिंग लगभग 4.46 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिए की गई है, जिससे आने वाले दिनों में खरीदी प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है।
राज्य सरकार ने इस बार गेहूं उपार्जन का लक्ष्य भी बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन कर दिया है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा लगभग 77 लाख मीट्रिक टन था। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस बार अधिक उत्पादन और खरीदी की उम्मीद कर रही है।
जहां चार संभागों में खरीदी शुरू हो चुकी है, वहीं शेष संभागों में 15 अप्रैल से उपार्जन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रशासन द्वारा सभी केंद्रों पर आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सरकार का दावा है कि इस बार पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान व्यवस्था से किसानों को अधिक लाभ मिलेगा और उपार्जन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होगी।