भारत का PFBR सफल, परमाणु ऊर्जा सुरक्षा में ऐतिहासिक बढ़त

Tue 07-Apr-2026,06:09 PM IST +05:30

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भारत का PFBR सफल, परमाणु ऊर्जा सुरक्षा में ऐतिहासिक बढ़त India-PFBR-First-Criticality-Nuclear-Energy-Breakthrough
  • भारत के 500 मेगावाट PFBR ने पहली क्रिटिकैलिटी हासिल की, जिससे परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली।

  • यह उपलब्धि भारत को स्वच्छ, कम कार्बन उत्सर्जन वाली ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाते हुए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाती है।

Delhi / Delhi :

Delhi/ भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक अपनी पहली क्रिटिकैलिटी प्राप्त की, जो नियंत्रित विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया की शुरुआत को दर्शाती है। यह उपलब्धि भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा लक्ष्यों और स्वदेशी तकनीकी विकास के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है।

यह सफलता Atomic Energy Regulatory Board (AERB) द्वारा सुरक्षा मानकों की गहन समीक्षा और मंजूरी के बाद संभव हो पाई। इस महत्वपूर्ण मौके पर Department of Atomic Energy के सचिव और Atomic Energy Commission के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे।

PFBR की डिजाइन और तकनीक का विकास Indira Gandhi Centre for Atomic Research (IGCAR) द्वारा किया गया है, जबकि इसका निर्माण और संचालन Bharatiya Nabhikiya Vidyut Nigam Limited (BHAVINI) द्वारा किया गया। यह पूरी तरह स्वदेशी प्रयासों का परिणाम है, जो भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी “ईंधन उत्पादन” क्षमता है। पारंपरिक रिएक्टर जहां ईंधन का उपयोग करते हैं, वहीं PFBR यूरेनियम-238 को प्लूटोनियम-239 में बदलकर अतिरिक्त ईंधन उत्पन्न करता है। साथ ही इसे भविष्य में थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में परिवर्तित करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम का अहम हिस्सा है।

इस तकनीक से भारत अपने सीमित यूरेनियम संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर सकता है और भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सकता है। यह देश को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ स्वच्छ और कम कार्बन उत्सर्जन वाली ऊर्जा उपलब्ध कराने में भी मदद करेगा।

PFBR परियोजना में उन्नत सुरक्षा प्रणालियां, उच्च तापमान तरल सोडियम शीतलक तकनीक और बंद ईंधन चक्र जैसी आधुनिक विशेषताएं शामिल हैं। इससे परमाणु अपशिष्ट को कम करने और संसाधनों के पुनर्चक्रण में भी मदद मिलती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत को वैश्विक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी देशों की श्रेणी में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही यह “आत्मनिर्भर भारत” के विजन को भी मजबूत करता है।

यह परियोजना वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों के वर्षों के परिश्रम का परिणाम है। इससे न केवल ऊर्जा उत्पादन बल्कि उन्नत इंजीनियरिंग, सामग्री विज्ञान और रिएक्टर डिजाइन में भारत की क्षमता को भी मजबूती मिली है।

कुल मिलाकर, PFBR की पहली क्रिटिकैलिटी भारत के लिए केवल तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि एक स्थायी, सुरक्षित और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में बड़ा कदम है।