मैलानी-नानपारा रेल मार्ग को मिला हेरिटेज रूट का दर्जा, मीटर गेज की ऐतिहासिक पहचान को सहेजेगा भारतीय रेलवे

Tue 07-Apr-2026,02:46 PM IST +05:30

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मैलानी-नानपारा रेल मार्ग को मिला हेरिटेज रूट का दर्जा, मीटर गेज की ऐतिहासिक पहचान को सहेजेगा भारतीय रेलवे Mailani Nanpara Rail Route
  • मैलानी-नानपारा रेल मार्ग को मिला हेरिटेज रूट का दर्जा.

  • मीटर गेज लाइन को मूल स्वरूप में संरक्षित रखने का फैसला.

  • पर्यटन को बढ़ावा, लेकिन स्थानीय यात्रियों को हो सकती है परेशानी.

Uttar Pradesh / Lakhimpur :

Lakhimpur Kheri / उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र से गुजरने वाला ऐतिहासिक मैलानी-नानपारा रेल मार्ग अब एक नई पहचान के साथ सामने आएगा। भारतीय रेलवे ने इस लगभग 171 किलोमीटर लंबे मार्ग को हेरिटेज रूट के रूप में संरक्षित रखने का निर्णय लिया है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद अब यह रेल लाइन अपनी पारंपरिक मीटर गेज यानी छोटी लाइन के रूप में ही बनी रहेगी और इसे ब्रॉड गेज में परिवर्तित नहीं किया जाएगा। आमतौर पर देशभर में रेलवे आधुनिकीकरण के तहत मीटर गेज लाइनों को ब्रॉड गेज में बदला जा रहा है, लेकिन इस रूट की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए इसे उसी स्वरूप में सुरक्षित रखने का फैसला लिया गया है। यह रेल मार्ग वर्षों से तराई के घने जंगलों, प्राकृतिक सुंदरता और ग्रामीण जीवन की झलक दिखाने के लिए जाना जाता रहा है। जब छोटी लाइन की ट्रेन धीमी गति से जंगलों और खेतों के बीच से गुजरती है तो यात्रियों को प्रकृति के बेहद करीब होने का अनोखा अनुभव मिलता है। इस मार्ग पर स्थित पुराने रेलवे स्टेशन भी अपने आप में इतिहास की कहानी कहते हैं। रेलवे के अनुसार इन स्टेशनों को भी धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाएगा और इनके मूल स्वरूप को बनाए रखा जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक रेल मार्ग की विरासत को महसूस कर सकें। पर्यटन की दृष्टि से भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस रूट को हेरिटेज रूट घोषित किए जाने के बाद यहां पर्यटकों और रेल प्रेमियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। विशेष रूप से Dudhwa National Park और तराई क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को देखने आने वाले पर्यटकों के लिए यह रेल यात्रा एक अलग आकर्षण बन सकती है।

हालांकि रेलवे के इस फैसले से जहां एक ओर पर्यटन और विरासत संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय यात्रियों की परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। पहले इस मार्ग से मैलानी से लेकर पलिया, दुधवा, तिकुनिया, खैरटिया, मंझरा, बिछिया, निशानगाड़ा, मुर्तिहा और ककरहा होते हुए नानपारा तक हजारों यात्री नियमित रूप से यात्रा करते थे। इस रूट के जरिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग रोजमर्रा के काम, व्यापार, शिक्षा और इलाज के लिए आवाजाही करते थे। लेकिन अब ब्रॉड गेज ट्रेन के लिए रेलवे ने एक नया वैकल्पिक मार्ग प्रस्तावित किया है, जिसके तहत ट्रेन रायबोझा से होकर जंगलों के भीतर से गुजरने के बजाय उसके किनारे-किनारे भीरा होते हुए मैलानी तक पहुंचेगी। रेलवे ने इस नए रूट के सर्वे से जुड़ा पत्र भी जारी कर दिया है। इसके लागू होने के बाद कई यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटी लाइन की यह ट्रेन केवल परिवहन का साधन ही नहीं बल्कि क्षेत्र की पहचान और यादों का हिस्सा भी रही है। कई पीढ़ियों ने इसी ट्रेन से सफर किया है और यह मार्ग इलाके के सामाजिक और आर्थिक जीवन से गहराई से जुड़ा रहा है। ऐसे में हेरिटेज रूट बनने की खबर से कुछ लोग खुश हैं क्योंकि इससे इस ऐतिहासिक लाइन की पहचान सुरक्षित रहेगी, वहीं कई लोगों के चेहरे पर मायूसी भी दिखाई दे रही है क्योंकि उनके लिए यात्रा की सुविधा पहले जैसी नहीं रह पाएगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि विरासत को बचाने और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को संतुलित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है ताकि एक ओर इतिहास और प्रकृति की धरोहर सुरक्षित रहे और दूसरी ओर नई रेल परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क भी बेहतर बनाया जा सके।