साधना सप्ताह 2026 में IKS सत्र आयोजित, शिक्षा सुधार पर जोर

Thu 09-Apr-2026,03:32 PM IST +05:30

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साधना सप्ताह 2026 में IKS सत्र आयोजित, शिक्षा सुधार पर जोर IKS-Session-Sadhana-Week-2026
  • साधना सप्ताह 2026 के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने भारतीय ज्ञान प्रणाली पर संवाद सत्र आयोजित कर शिक्षा और शासन में इसकी प्रासंगिकता पर जोर दिया।

  • मिशन कर्मयोगी के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में ज्ञान, नवाचार और नीति निर्माण में भारतीय परंपराओं के महत्व पर चर्चा की गई।

Delhi / Delhi :

Delhi/ उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 2 से 8 अप्रैल 2026 तक मनाए गए साधना सप्ताह के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) पर एक संवादपूर्ण सत्र का सफल आयोजन किया गया। यह सप्ताह क्षमता विकास आयोग (CBC) के स्थापना दिवस और मिशन कर्मयोगी के पांच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जो नागरिक-केंद्रित सुशासन को बढ़ावा देने की एक महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यक्रम की शुरुआत संयुक्त सचिव (प्रशासन) सैयद एकराम रिज़वी के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत क्षमता विकास आयोग की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि यह पहल सरकारी कर्मचारियों के ज्ञान, कौशल और क्षमता को बढ़ाने के लिए विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराती है।

इस सत्र का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली की समकालीन शिक्षा, अनुसंधान और शासन में प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श को बढ़ावा देना था। इसमें इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारत की पारंपरिक बौद्धिक विरासत आधुनिक समस्याओं के समाधान, नवाचार और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आईआईटी हैदराबाद के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहन राघवन का संबोधन रहा। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि एक बहु-विषयी दृष्टिकोण के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि IKS विज्ञान, अभियांत्रिकी, मानविकी और प्रबंधन जैसे विभिन्न क्षेत्रों को समृद्ध कर सकती है।

डॉ. राघवन ने यह भी कहा कि IKS के एकीकरण से शिक्षा प्रणाली में रटने की प्रवृत्ति से हटकर एक समग्र मॉडल विकसित किया जा सकता है, जिसमें ज्ञान, अनुप्रयोग और मूल्यों का संतुलन हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकार की शिक्षा प्रणाली न केवल कुशल पेशेवर तैयार करेगी, बल्कि सामाजिक रूप से जिम्मेदार और सांस्कृतिक रूप से जागरूक नागरिक भी बनाएगी।

सत्र के अंत में प्रश्नोत्तर कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस दौरान शासन में पारंपरिक ज्ञान को शामिल करने और सतत विकास के लिए इसके महत्व पर चर्चा की गई।

इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह पहल मिशन कर्मयोगी के तहत एक ज्ञान-आधारित और अनुकूलनशील शासन प्रणाली के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।