पातालेश्वर महादेव सातदेव में 21 दिवसीय महायज्ञ, 41 टन सामग्री से हुआ भव्य आयोजन
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान सप्तऋषियों की तपोभूमि है, जहां स्वयंभू पातालेश्वर महादेव शिवलिंग की गहराई आज भी रहस्य बनी हुई है।
भैरूंदा के सातदेव में 21 दिवसीय महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन 21 क्विंटल सामग्री से हवन हुआ, जिसमें कुल 41 टन सामग्री का उपयोग किया गया।
Bhairunda News/ मध्य प्रदेश के भैरूंदा क्षेत्र के ग्राम सातदेव स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित 21 दिवसीय महायज्ञ ने धार्मिक आस्था और भव्यता का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। 18 मार्च से शुरू होकर 7 अप्रैल तक चले इस आयोजन में प्रतिदिन 21 क्विंटल सामग्री से महाहवन किया गया। नर्मदा परिक्रमा वासी शिवानंद महाराज के सानिध्य में संपन्न इस कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
इस भव्य आयोजन की शुरुआत 18 मार्च को शोभायात्रा के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान 1100 लीटर दूध से मां नर्मदा का विशेष अभिषेक भी किया गया, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र रहा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सातदेव क्षेत्र सप्तऋषियों की तपोभूमि रहा है। माना जाता है कि ब्रह्माजी के मानस पुत्र सप्तऋषियों ने यहां कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव पातालेश्वर महादेव के रूप में यहां स्वयंभू शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए। इस शिवलिंग की गहराई आज भी रहस्य बनी हुई है, क्योंकि 25 से 30 फीट तक खुदाई के बाद भी इसका अंत नहीं पाया जा सका है।
इतिहास में भी इस स्थान का विशेष महत्व रहा है। गोंड राजाओं ने इस स्थान का नाम सप्तऋषियों के आधार पर सातदेव रखा था। बाद में भोसले और होल्कर शासकों ने भी इस पवित्र स्थल की सेवा की। इंदौर की राजमाता अहिल्याबाई होल्कर द्वारा यहां निर्मित छतरी इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ाती है।
21 दिनों तक चले इस महायज्ञ में कुल 41 टन सामग्री का उपयोग किया गया, जिसमें विभिन्न जड़ी-बूटियां, हवन सामग्री और सोने-चांदी का भी समावेश रहा। प्रतिदिन 21 क्विंटल सामग्री से महाहवन संपन्न हुआ, जो इस आयोजन की भव्यता को दर्शाता है।
कार्यक्रम स्थल को लगभग 5 एकड़ क्षेत्र में फैले विशाल पंडाल में आयोजित किया गया, जहां हजारों श्रद्धालुओं के बैठने की समुचित व्यवस्था की गई थी। पूरे परिसर को आकर्षक रोशनी और सजावट से सुसज्जित किया गया, जिससे शाम के समय वातावरण और भी दिव्य प्रतीत होता था।
29 मार्च से 7 अप्रैल तक प्रतिदिन संगीतमय शिव महापुराण कथा का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। मंत्रोच्चार, दीपों की रोशनी और भक्ति संगीत के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।
आयोजकों का दावा है कि इस तरह का भव्य और विशाल धार्मिक आयोजन प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के चुनिंदा आयोजनों में शामिल है। मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचे और इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने।