IIPA के जरिए एआई आधारित स्मार्ट गवर्नेंस को बढ़ावा दे रहा भारत
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आईआईपीए को एआई आधारित स्मार्ट गवर्नेंस के लिए नोडल संस्थान बनाने का प्रस्ताव, प्रशासनिक प्रशिक्षण में तकनीकी क्रांति की तैयारी।
भारत एआई मिशन, सरल एआई पोर्टल और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर जोर।
मिशन कर्मयोगी और CPGRAMS जैसी योजनाओं से करोड़ों अधिकारियों की क्षमता बढ़ाकर नागरिक-केंद्रित प्रशासन को मजबूत किया जा रहा है।
New Delhi/ केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रशासनिक सुधारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) को देश में एआई-संचालित “स्मार्ट गवर्नेंस” के लिए नोडल संस्थान के रूप में विकसित करने की बात कही। यह पहल भारत में तकनीक-आधारित प्रशासनिक सुधारों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
डॉ. सिंह ने यह प्रस्ताव नई दिल्ली में आयोजित आईआईपीए के 72वें संस्थापक दिवस कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां वे “सुशासन के लिए एआई” विषय पर 5वें डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्षिक स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आईआईपीए देश के प्रशासनिक ढांचे में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और नीति निर्माण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि आईआईपीए को क्षमता निर्माण आयोग, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (NCGG), लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) और प्रशासनिक सुधार विभाग जैसे संस्थानों के साथ मिलकर एआई आधारित प्रशिक्षण ढांचा तैयार करना चाहिए। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों में दक्ष बनाया जा सकेगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में शासन प्रणाली तेजी से डिजिटल और डेटा-आधारित हो रही है। ऐसे में एआई आधारित प्रशिक्षण और स्मार्ट गवर्नेंस मॉडल प्रशासनिक दक्षता को कई गुना बढ़ा सकते हैं। उन्होंने आईआईपीए की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि आईआईपीए की सदस्यता में हाल ही में युवा सिविल सेवकों, जैसे सहायक सचिव स्तर के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है, जिससे इसकी पहुंच लगभग 11,000 सदस्यों तक बढ़ गई है। संस्थान ने इस वर्ष लगभग 6,000 अधिकारियों के लिए 129 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
डॉ. सिंह ने प्रशासनिक सुधारों में निजी क्षेत्र, सशस्त्र बलों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सुशासन केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह एक समग्र और सहयोगात्मक प्रक्रिया होनी चाहिए।
उन्होंने जिला स्तर पर आईआईपीए अध्यायों और जिला शासन सूचकांकों की शुरुआत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कदम जमीनी स्तर पर प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने में सहायक होगा। इससे डेटा आधारित शासन और बेहतर निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में डॉ. सिंह ने ‘सरल एआई’ पोर्टल के लॉन्च की भी घोषणा की, जिसे राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के माध्यम से विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य जटिल तकनीकी जानकारी को सरल और नागरिक-अनुकूल भाषा में प्रस्तुत करना है, ताकि आम लोग भी एआई तकनीक को समझ सकें।
उन्होंने भारत एआई मिशन (India AI Mission) को देश के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की रीढ़ बताया। 10,370 करोड़ रुपये के इस मिशन का उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है।
सरकार द्वारा 38,000 CPU और 22,000 GPU उपलब्ध कराए जाने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इससे भारत की कंप्यूटिंग क्षमता में बड़ा सुधार होगा और एआई आधारित नवाचार को गति मिलेगी।
डॉ. सिंह ने बताया कि CPGRAMS (सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली) ने 95 प्रतिशत से अधिक समाधान दर हासिल की है। इसे अब हाइब्रिड मॉडल में बदल दिया गया है, जहां समाधान के बाद मानव स्तर पर भी फीडबैक लिया जाता है।
उन्होंने मिशन कर्मयोगी की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब तक 14.5 करोड़ से अधिक सरकारी अधिकारी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़ चुके हैं। यह पहल 23 भाषाओं में डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध कराती है।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि नागरिक-केंद्रित और पारदर्शी शासन व्यवस्था बनाना है, जिसमें एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।