Asha Bhosle Death | आशा भोसले का निधन, भारतीय संगीत जगत को बड़ा झटका

Sun 12-Apr-2026,01:40 PM IST +05:30

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Asha Bhosle Death | आशा भोसले का निधन, भारतीय संगीत जगत को बड़ा झटका Asha Bhosle
  • आशा भोसले का 92 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन. 

  • 14 भाषाओं में 12,000 से अधिक गानों की विरासत. 

  • दादा साहेब फाल्के और पद्म विभूषण से सम्मानित. 

Maharashtra / Mumbai :

Mumbai / भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। महान गायिका आशा भोसले का रविवार को 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है, वहीं संगीत और फिल्म जगत में गहरा सन्नाटा छा गया है।

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने इस दुखद समाचार की पुष्टि करते हुए बताया कि आशा भोसले का पार्थिव शरीर सोमवार सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक उनके निवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, आशा भोसले को कार्डियक अरेस्ट के बाद तुरंत अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। डॉक्टर प्रतीत समदानी ने बताया कि इलाज के दौरान उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था, जिससे स्थिति गंभीर हो गई थी।

आशा भोसले, जिन्हें स्वर की जादूगरनी कहा जाता है, ने अपने करियर में संगीत की दुनिया को अमूल्य योगदान दिया। वह महान गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं, लेकिन उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और अपनी आवाज़ से करोड़ों दिलों पर राज किया। उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है, क्योंकि उन्होंने 14 भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने गाए।

उनके गानों की विविधता उन्हें खास बनाती है। उन्होंने फिल्मी गीतों के साथ-साथ गजल, भजन, पॉप और शास्त्रीय संगीत में भी अपनी अद्भुत प्रतिभा दिखाई। “पिया तू अब तो आजा”, “दम मारो दम”, “चुरा लिया है तुमने जो दिल को”, “झुमका गिरा रे”, “दिल चीज़ क्या है” और “इन आंखों की मस्ती” जैसे गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।

आशा भोसले को अपने जीवन में कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। वह ग्रैमी अवार्ड जीतने वाली पहली भारतीय गायिका थीं। इसके अलावा उन्हें दादा साहेब फाल्के अवार्ड और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च सम्मानों से भी नवाजा गया। 8 सितंबर 1933 को जन्मीं आशा ने बहुत कम उम्र में ही संगीत की दुनिया में कदम रखा था और दशकों तक अपनी मधुर आवाज़ से लोगों को मंत्रमुग्ध करती रहीं।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों से उम्र के कारण उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन इसके बावजूद वह सक्रिय रहीं और संगीत कार्यक्रमों में हिस्सा लेती थीं। उनके निधन की खबर सुनकर उनके चाहने वालों, कलाकारों और पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।

आशा भोसले का जाना सिर्फ एक महान कलाकार का निधन नहीं है, बल्कि भारतीय संगीत की एक अमूल्य विरासत का अंत है। उनकी आवाज़ हमेशा अमर रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।