नाईपर-नोवार्टिस समझौता, औषधीय शोध और नवाचार को बढ़ावा

Wed 15-Apr-2026,05:24 PM IST +05:30

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नाईपर-नोवार्टिस समझौता, औषधीय शोध और नवाचार को बढ़ावा Niper-Novartis-Pharma-Research-Collaboration-India
  • नाईपर मोहाली और नोवार्टिस के बीच समझौता, औषधीय शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उद्योग-अकादमिक सहयोग मजबूत होगा।

  • सरकार का फोकस उद्योग की जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान, स्वास्थ्य क्षेत्र में नई तकनीक और समाधान विकसित करने पर जोर।

Delhi / New Delhi :

नई दिल्ली/ देश में औषधीय अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए NIPER Mohali और Novartis Healthcare Private Limited के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता नई दिल्ली में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग के सचिव Manoj Joshi की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

इस सहयोग के तहत नाईपर मोहाली के एक संकाय सदस्य को नोवार्टिस द्वारा समर्थित ‘डेवलपमेंट पायनियर ग्रांट’ के लिए चयनित किया गया है। इस अनुदान का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक शोध को बढ़ावा देना और अकादमिक जगत तथा उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

औषधि विभाग के सचिव मनोज जोशी ने इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे सहयोग से शोध कार्यों की उपयोगिता और प्रभावशीलता बढ़ेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना आवश्यक है, ताकि नवाचार का सीधा लाभ समाज और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिल सके।

डेवलपमेंट पायनियर ग्रांट के लिए देशभर के सात नाईपर संस्थानों से संकाय सदस्यों को अपने शोध प्रस्ताव प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। इस पहल को अच्छी प्रतिक्रिया मिली और कुल 42 प्रस्ताव प्राप्त हुए। स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति द्वारा गहन मूल्यांकन के बाद नाईपर मोहाली के एक संकाय सदस्य को इस प्रतिष्ठित अनुदान के लिए चुना गया।

इस सहयोग का उद्देश्य न केवल अनुसंधान क्षमता को मजबूत करना है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नई तकनीकों और समाधानों के विकास को भी प्रोत्साहित करना है। इससे भारत में औषधीय नवाचार पारितंत्र को मजबूती मिलेगी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

समारोह में औषधि विभाग और नाईपर के वरिष्ठ अधिकारी, साथ ही नोवार्टिस के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। सभी ने इस साझेदारी को देश के वैज्ञानिक विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक अहम पहल बताया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सहयोग से अकादमिक शोध को व्यावसायिक रूप देने में मदद मिलेगी और भारत को फार्मास्यूटिकल अनुसंधान में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान मिलेगा।