Nana Patekar Death | नाना पाटेकर का निधन कैसे हुआ? 75 साल की उम्र में दिग्गज अभिनेता ने दुनिया को कहा अलविदा

Thu 08-Oct-2026,11:55 AM IST +05:30

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Nana Patekar Death | नाना पाटेकर का निधन कैसे हुआ? 75 साल की उम्र में दिग्गज अभिनेता ने दुनिया को कहा अलविदा Nana Patekar Death
  • नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से निधन।

  • बॉलीवुड और राजनीतिक जगत की कई हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि।

  • फिल्मों और सामाजिक कार्यों के जरिए बनाई अपनी अलग पहचान।

Maharashtra / Mumbai :

Mumbai / जिस अभिनेता की आवाज ने पर्दे पर गुस्सा, दर्द और इंसानियत को एक साथ जिंदा किया, आज वही आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई। गोवा से आई खबर ने बॉलीवुड, मराठी सिनेमा और उनके करोड़ों प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया।

नाना पाटेकर के निधन से सिनेमा जगत में शोक
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी। उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद तत्काल अस्पताल ले जाया गया। मणिपाल अस्पताल में डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित किया गया। 

नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही बॉलीवुड और मराठी फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर कलाकारों, राजनीतिक नेताओं और प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया। अपनी अलग आवाज, बेबाक संवाद अदायगी और किरदारों में गहराई भर देने की क्षमता के लिए मशहूर नाना पाटेकर ने कई दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया।

अस्पताल से सामने आई जानकारी के मुताबिक, नाना पाटेकर को उनके गोवा स्थित घर से गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों की टीम ने लंबे समय तक उन्हें पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। मामले में मेडिको-लीगल प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम कराया जाना है। 

रितेश देशमुख ने कहा- यह एक युग का अंत
अभिनेता रितेश देशमुख ने नाना पाटेकर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह खबर सुनकर उन्हें ऐसा लगा जैसे किसी ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी हो। रितेश ने नाना को बेजोड़ और अद्वितीय अभिनेता बताया।

उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ऐसा कोई किरदार नहीं था जिसे निभा न सकते हों। चाहे गंभीर नायक हो, खौफनाक खलनायक हो या हास्य भूमिका, उन्होंने हर किरदार में अपनी अलग पहचान बनाई। रितेश ने Bluffmaster और Housefull 5 में उनके साथ काम करने की याद भी साझा की और मराठी फिल्म में उनके साथ काम न कर पाने का अफसोस जताया। उन्होंने नाना के साथ हुई बातचीत, सीख और प्रोत्साहन को याद करते हुए इसे एक युग का अंत बताया। 

नितिन गडकरी ने याद किया पुराना रिश्ता
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी नाना पाटेकर के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि नाना के साथ उनके बेहद घनिष्ठ और आत्मीय संबंध थे। गडकरी ने उनके पांच दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर और दमदार अभिनय को याद किया।

गडकरी ने नाना पाटेकर के सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख किया। खास तौर पर नाम फाउंडेशन के जरिए महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण और जलग्रहण विकास के काम तथा किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों की मदद को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, नाना सिर्फ शानदार कलाकार ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील व्यक्ति भी थे। 

राजनीतिक नेताओं ने भी दी श्रद्धांजलि
पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने नाना पाटेकर को भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली आवाजों में से एक बताया। उन्होंने परिंदा, क्रांतिवीर, प्रहार और अब तक छप्पन जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को याद किया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें प्रख्यात अभिनेता, रंगमंच के सशक्त कलाकार और संवेदनशील समाजसेवी बताते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने अपने अभिनय से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया और सामाजिक सरोकारों के जरिए समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दिखाई।

महाराष्ट्र के मंत्री आशीष शेलार ने भी उनके निधन को मराठी और हिंदी फिल्म जगत के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने नाना को रंगमंच, सिनेमा और सामाजिक कार्यों से अपनी अलग पहचान बनाने वाला कलाकार बताया।

चार दशक से ज्यादा का यादगार सफर
नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म गमन से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद परिंदा, क्रांतिवीर, तिरंगा, अग्नि साक्षी, खामोशी, अब तक छप्पन, अपहरण, राजनीति और नटसम्राट जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।

उनकी संवाद अदायगी और चेहरे के भाव उनकी सबसे बड़ी पहचान बने। गंभीर भूमिकाओं के साथ-साथ उन्होंने हास्य किरदारों में भी अपनी अलग छाप छोड़ी। वेलकम में उदय शेट्टी का किरदार भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ।

नाना पाटेकर केवल अभिनेता नहीं थे। सामाजिक कार्यों और ग्रामीण समुदायों से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता भी चर्चा में रही। नाम फाउंडेशन के माध्यम से जल संरक्षण और किसान परिवारों की सहायता के प्रयासों ने उनके व्यक्तित्व के दूसरे पहलू को सामने रखा।

सिनेमा ने खोया एक अलग आवाज वाला कलाकार
नाना पाटेकर के निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसकी शैली की नकल करना आसान नहीं था। वे संवाद बोलते नहीं थे, बल्कि उन्हें किरदार की भावनाओं के साथ जीवंत करते थे।

आज उनके प्रशंसक उनकी फिल्मों, संवादों और किरदारों को याद कर रहे हैं। उनके जाने से पैदा हुआ खालीपन सिर्फ फिल्म उद्योग का नहीं, बल्कि उन दर्शकों का भी है, जिन्होंने दशकों तक उन्हें पर्दे पर देखा और महसूस किया।

नाना पाटेकर का सफर खत्म हुआ है, लेकिन उनके निभाए किरदार और उनकी आवाज भारतीय सिनेमा की स्मृतियों में लंबे समय तक जीवित रहेंगे।