राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की चेतावनी! क्या AI पर निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है?

Tue 13-Oct-2026,11:50 PM IST +05:30

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की चेतावनी! क्या AI पर निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है? AI in Defence
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों पर जोर दिया।

  • उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा में AI के उपयोग के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।

  • वैज्ञानिक अनुसंधान, रक्षा नवाचार और आर्थिक मजबूती को महत्वपूर्ण बताया।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / आधुनिक युद्ध अब केवल जमीन, आसमान और समुद्र तक सीमित नहीं रहा। साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने युद्ध की तस्वीर बदल दी है। ऐसे में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कौन-सी अहम चेतावनी दी है?

देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, आधुनिक युद्ध तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की बढ़ती भूमिका को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने महत्वपूर्ण विचार रखे हैं। 13 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन में 66वें राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय पाठ्यक्रम के संकाय सदस्यों और पाठ्यक्रम प्रतिभागियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के परिदृश्य ने नई और जटिल चुनौतियां पैदा कर दी हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर तैयारी, रणनीतिक दूरदृष्टि और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता बेहद जरूरी है।

आधुनिक युद्ध की बदलती तस्वीर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आधुनिक युद्ध की तकनीकें अब पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं। साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी जैसे नए क्षेत्रों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में सुरक्षा से जुड़े मामलों पर तेजी से और सही निर्णय लेना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बदलती परिस्थितियों में केवल पुरानी रणनीतियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। रक्षा व्यवस्था को नई तकनीकों, उभरते खतरों और भविष्य की संभावनाओं के अनुसार तैयार करना आवश्यक है। इसके लिए रणनीतिक सोच, तकनीकी समझ और समय पर निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करना होगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा में विज्ञान और तकनीक की भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा केवल सैन्य क्षमताओं तक सीमित नहीं है। इसके लिए वैज्ञानिक संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच करीबी सहयोग आवश्यक है। वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से विकसित तकनीकों को वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगी समाधानों में बदलना समय की मांग है।

उन्होंने बताया कि हाल के संघर्षों ने कम लागत वाली तकनीकों के महत्व को उजागर किया है। ऐसी तकनीकें उन्नत रक्षा प्रणालियों की पूरक बन सकती हैं और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर सकती हैं।

इसका अर्थ है कि रक्षा क्षेत्र में सफलता केवल महंगे हथियारों और अत्याधुनिक प्रणालियों पर निर्भर नहीं करती। नवाचार, संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल और जरूरत के अनुसार तकनीक विकसित करना भी महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रपति ने अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना जैसी सरकारी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी पहलें नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संबंध को मजबूत करने में मददगार हैं। रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और वैज्ञानिक उपलब्धियों को व्यावहारिक उपयोग तक पहुंचाना देश की सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

AI पर निर्भरता को लेकर राष्ट्रपति की अहम बात
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि विज्ञान, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्णय लेने की प्रक्रिया केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर निर्भर रहकर नहीं चल सकती। AI उपयोगी विश्लेषण और जानकारी उपलब्ध करा सकता है, लेकिन उसके इस्तेमाल में संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है।

राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में तकनीक के साथ मानवीय विवेक, परिस्थितियों की समझ और जिम्मेदार निर्णय प्रक्रिया का महत्व बना रहता है। राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब दुनिया भर में रक्षा प्रणालियों और रणनीतिक योजना में AI की भूमिका पर लगातार चर्चा हो रही है।

आर्थिक मजबूती भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा
राष्ट्रपति ने आर्थिक सुदृढ़ता को राष्ट्रीय सुरक्षा के ढांचे का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि किसी देश की सुरक्षा केवल उसकी सैन्य शक्ति से निर्धारित नहीं होती, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और संकटों से उबरने की क्षमता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की उस क्षमता का उल्लेख किया, जिसके तहत देश ने बाहरी कारकों से पैदा हुए व्यवधानों का सामना किया और उनसे उबरने की क्षमता दिखाई। राष्ट्रपति के अनुसार, भारत ने अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता से समझौता किए बिना यह उपलब्धि हासिल की है।

आर्थिक स्थिरता से देश को रक्षा जरूरतों, तकनीकी विकास और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दीर्घकालिक योजनाएं बनाने में मदद मिलती है। इसलिए आर्थिक मजबूती और राष्ट्रीय सुरक्षा को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

भारत के लिए क्या है संदेश?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संबोधन का मुख्य संदेश यह है कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को तकनीकी नवाचार, वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक सैन्य तैयारी और आर्थिक मजबूती पर समान रूप से ध्यान देना होगा।

साइबर सुरक्षा से लेकर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और AI तक, नए क्षेत्रों में तेजी से हो रहे बदलाव रक्षा रणनीतियों को लगातार प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिक संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच सहयोग बढ़ाना, कम लागत वाले प्रभावी समाधान विकसित करना और निर्णय प्रक्रिया को मजबूत बनाना महत्वपूर्ण होगा।

साथ ही, AI जैसी उभरती तकनीकों का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से करना भी जरूरी है। तकनीक की क्षमता का लाभ उठाते हुए मानवीय निर्णय और जिम्मेदारी को बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम है।

कुल मिलाकर, राष्ट्रपति का यह संबोधन बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत की तैयारियों, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित करता है।