दिव्यांग कोटे से MBBS पाने के लिए युवक ने कटवाया पैर, सिस्टम पर उठे सवाल
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एमबीबीएस में दिव्यांग कोटे से प्रवेश के लिए युवक द्वारा पैर कटवाने की घटना ने शिक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू की, आरक्षण प्रणाली के दुरुपयोग पर उठे सवाल।
विशेषज्ञों ने इसे खतरनाक प्रवृत्ति बताते हुए नियमों में सख्ती और मानसिक परामर्श की जरूरत बताई।
Delhi / दिव्यांग कोटे से एमबीबीएस में दाखिला पाने के लिए एक युवक द्वारा अपना पैर कटवाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला सामने आते ही शिक्षा व्यवस्था, आरक्षण प्रणाली और नैतिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, युवक ने खुद को दिव्यांग श्रेणी में दिखाने के उद्देश्य से यह अत्यंत खतरनाक कदम उठाया।
सूत्रों के मुताबिक, मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफल होने के बाद युवक को यह विश्वास था कि दिव्यांग कोटे के तहत उसे एमबीबीएस सीट मिल सकती है। इसी लालच और दबाव में उसने कथित तौर पर निजी स्तर पर ऐसा कदम उठाया, जिससे वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो गया। घटना के बाद युवक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग दोनों हरकत में आ गए हैं। प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसमें किसी और की भूमिका तो नहीं थी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम में मौजूद खामियों और अत्यधिक प्रतिस्पर्धा का परिणाम भी है।
चिकित्सा और सामाजिक विशेषज्ञों ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताया है। उनका कहना है कि दिव्यांग कोटा उन लोगों के लिए बनाया गया है, जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है। ऐसे मामलों से न केवल नियमों का दुरुपयोग होता है, बल्कि वास्तविक दिव्यांग उम्मीदवारों के अधिकारों पर भी असर पड़ता है।
डॉक्टरों का मानना है कि एमबीबीएस जैसे पेशे में शारीरिक और मानसिक संतुलन दोनों जरूरी हैं। जानबूझकर दिव्यांगता अपनाना न केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए घातक है, बल्कि भविष्य की चिकित्सा सेवा के लिहाज से भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह घटना समाज के सामने यह सोचने का मौका देती है कि क्या सफलता की दौड़ में हम इंसानी मूल्यों को पीछे छोड़ते जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए नियमों की समीक्षा की जाएगी।