सेहत का सूक्ष्म रक्षक सेलेनियम, जिसकी कमी बन सकती है बड़ी बीमारी
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Selenium-rich foods for better health
सेलेनियम थायराइड और हार्मोन संतुलन के लिए जरूरी.
इम्युनिटी मजबूत करने में निभाता है अहम भूमिका.
कमी और अधिकता, दोनों से हो सकती हैं स्वास्थ्य समस्याएं.
Nagpur / मानव शरीर को स्वस्थ रखने के लिए केवल प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा ही नहीं, बल्कि कई सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है। इन्हीं में से एक है सेलेनियम, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह एक ऐसा खनिज है जिसकी आवश्यकता शरीर को बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन इसकी कमी या अधिकता दोनों ही स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सेलेनियम शरीर में एक सुरक्षा प्रहरी की तरह काम करता है, जो कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभाता है।
सेलेनियम प्राकृतिक रूप से मिट्टी, पानी और कुछ खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। यह शरीर में जाकर सेलेनोप्रोटीन नामक विशेष प्रोटीन बनाने में मदद करता है। ये प्रोटीन एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करते हैं और शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाते हैं। ऑक्सीडेटिव तनाव वह स्थिति है, जब शरीर में फ्री रेडिकल्स की संख्या बढ़ जाती है और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है। यही प्रक्रिया कई गंभीर बीमारियों की जड़ मानी जाती है।
थायराइड ग्रंथि के लिए सेलेनियम को बेहद जरूरी माना जाता है। शरीर के अन्य अंगों की तुलना में थायराइड में सेलेनियम की मात्रा अधिक होती है। यह थायराइड हार्मोन के निर्माण और संतुलन में मदद करता है। यदि शरीर में सेलेनियम की कमी हो जाए, तो थायराइड से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जिससे थकान, वजन में बदलाव और हार्मोन असंतुलन जैसी दिक्कतें सामने आती हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में भी सेलेनियम की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह श्वेत रक्त कोशिकाओं की सक्रियता बढ़ाता है, जिससे शरीर संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ पाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जिन लोगों के शरीर में सेलेनियम का स्तर संतुलित रहता है, उनमें वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम देखा गया है। लंबे समय तक कमी रहने पर बार-बार बीमार पड़ने की शिकायत हो सकती है।
हृदय स्वास्थ्य के संदर्भ में भी सेलेनियम पर शोध किए गए हैं। कुछ अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि यह सूजन को कम करने और खराब कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीकरण को रोकने में मदद कर सकता है। इससे हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम घट सकता है। हालांकि चिकित्सक यह भी स्पष्ट करते हैं कि सेलेनियम अकेले हृदय रोगों से सुरक्षा की गारंटी नहीं देता, बल्कि यह संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ मिलकर ही प्रभावी होता है।
सेलेनियम की कमी से शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अत्यधिक थकान, मांसपेशियों में कमजोरी, बालों का झड़ना, नाखूनों का कमजोर होना और मानसिक एकाग्रता में कमी इसके सामान्य संकेत माने जाते हैं। गंभीर मामलों में हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचने जैसी स्थितियां भी सामने आ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक कमी बनी रहने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है।
यह खनिज कई खाद्य स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है। नट्स, बीज, साबुत अनाज, मशरूम, लहसुन, दालें और कुछ प्रकार के चावल सेलेनियम के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। ब्राजील नट्स में इसकी मात्रा विशेष रूप से अधिक पाई जाती है, इसलिए सीमित मात्रा में इसका सेवन पर्याप्त हो सकता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि जरूरत से ज्यादा सेलेनियम का सेवन नुकसानदायक हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार वयस्क व्यक्ति के लिए सेलेनियम की दैनिक आवश्यकता सीमित होती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में इसकी जरूरत थोड़ी अधिक हो सकती है, लेकिन इसके लिए भी डॉक्टर की सलाह जरूरी मानी जाती है। अत्यधिक मात्रा में सेलेनियम लेने से सांस से अजीब गंध आना, उलटी, पेट दर्द और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
आज के समय में जब लोग सप्लीमेंट्स के जरिए हर पोषक तत्व लेने की कोशिश करते हैं, तब सेलेनियम के मामले में सावधानी और भी जरूरी हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जांच और सलाह के सेलेनियम सप्लीमेंट लेना जोखिम भरा हो सकता है। संतुलित और विविध आहार के जरिए इसकी जरूरत पूरी करना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।
कुल मिलाकर सेलेनियम एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण खनिज है, जो शरीर की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। इसकी सही मात्रा से थायराइड, इम्युनिटी और कोशिकाओं की सुरक्षा बेहतर होती है। जरूरत है तो बस संतुलन बनाए रखने की, ताकि यह खनिज सेहत का रक्षक बना रहे, समस्या का कारण नहीं।