बंगाल विधानसभा में नई शुरुआत: तापस राय बने प्रोटेम स्पीकर, 290 विधायक लेंगे शपथ
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West Bengal Assembly
तापस राय बने बंगाल विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर.
290 विधायक दो दिनों में लेंगे शपथ.
विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव शुक्रवार को होगा.
Kolkata / Kolkata की मानिकतला सीट से भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक Tapas Roy ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ ली। लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल R. N. Ravi ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari, मंत्रिपरिषद के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
प्रोटेम स्पीकर के रूप में तापस राय अब बंगाल की नई 18वीं विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाएंगे। विधानसभा का शपथ ग्रहण समारोह बुधवार सुबह से शुरू होगा और दो दिनों तक चलेगा। इस दौरान कुल 290 विधायक शपथ लेंगे। राज्य की 294 सीटों में से फलता सीट पर चुनाव रद्द होने और कुछ नेताओं के दो सीटों से जीतने के कारण फिलहाल 290 विधायकों का ही शपथ ग्रहण कराया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, विधायकों का शपथ ग्रहण जिला-वार चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहले दिन मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के सदस्य शपथ लेंगे, जबकि दूसरे दिन अन्य जिलों के विधायक विधानसभा में शपथ ग्रहण करेंगे। शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
हाल ही में हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 207 सीटों पर बड़ी जीत दर्ज कर राज्य की सत्ता हासिल की है। वहीं Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress को 80 सीटों पर जीत मिली। इसके अलावा कांग्रेस, माकपा, आईएसएफ और आम जनता उन्नयन पार्टी को भी कुछ सीटें हासिल हुई हैं।
शपथ लेने के बाद तापस राय ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब विधानसभा में तृणमूल को “मुंह में सेलो टेप लगाकर बैठना चाहिए।” साथ ही उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की हार और सुवेंदु अधिकारी की जीत उनके लिए बेहद खुशी का क्षण है।
तापस राय बंगाल की राजनीति के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वह 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने मानिकतला सीट से जीत हासिल की। इससे पहले वह बरानगर सीट से लगातार छह बार विधायक रह चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल विधानसभा में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य की राजनीति में अब नए समीकरण और नई बहसें देखने को मिल सकती हैं। वहीं विधानसभा का आगामी सत्र काफी अहम माना जा रहा है, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराव की संभावना भी जताई जा रही है।