तमिलनाडु में AIADMK में बड़ा बवाल: बागी नेताओं पर EPS का एक्शन, 25 विधायकों पर अयोग्यता का खतरा
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Tamil Nadu Politics
फ्लोर टेस्ट के बाद AIADMK में बड़ा राजनीतिक संकट.
कई बागी नेताओं को पार्टी से निकाला गया.
25 विधायकों पर अयोग्यता की तलवार लटकी.
Chennai / Tamil Nadu की राजनीति में All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) के भीतर जारी सियासी संकट अब और गहरा गया है। पार्टी प्रमुख Edappadi K. Palaniswami ने बगावत करने वाले नेताओं S. P. Velumani, C. V. Shanmugam और C. Vijayabaskar समेत कई नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह कार्रवाई विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान बागी विधायकों द्वारा विजय सरकार के समर्थन में क्रॉस वोटिंग करने के बाद की गई।
फ्लोर टेस्ट में बागी विधायकों के समर्थन से Vijay की सरकार ने आसानी से बहुमत साबित कर दिया। सरकार को कुल 144 विधायकों का समर्थन मिला। इसके बाद AIADMK नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाते हुए पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले 25 विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए विधानसभा स्पीकर के पास आवेदन भी दिया है।
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके गठबंधन चुनाव के बाद बहुमत से पीछे रह गया था। लेकिन बाद में कांग्रेस, वाम दलों, आईयूएमएल और AIADMK के बागी गुट के समर्थन से विजय सरकार ने विश्वास मत हासिल कर लिया। इसी घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
फ्लोर टेस्ट के तुरंत बाद सीवी षणमुगम ने खुलकर ईपीएस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पलानीस्वामी ने पार्टी की मूल “एंटी-डीएमके” विचारधारा को छोड़ दिया है। षणमुगम ने कहा कि पार्टी को मजबूत करने के लिए पुराने नेताओं को वापस लाने की मांग लंबे समय से उठ रही थी, लेकिन नेतृत्व ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने खुद पर लगे विश्वासघात के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि असल में पार्टी की बुनियादी राजनीति से भटकने वाले ईपीएस हैं। उनके बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, चुनाव नतीजों के कुछ ही दिनों बाद सीवी षणमुगम और एसपी वेलुमणि समेत कुछ विधायकों ने पलानीस्वामी के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी। उन्होंने करीब 30 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए प्रोटेम स्पीकर को याचिका सौंपी और एसपी वेलुमणि को पार्टी नेता घोषित करने की मांग की।
AIADMK के लिए यह संकट ऐसे समय में आया है, जब पार्टी 2026 विधानसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। 167 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी केवल 47 सीटें ही जीत सकी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।