Delhi / Delhi : Delhi / Narendra Modi ने आज गुजरात के Somnath Temple में देश के लौह पुरुष Sardar Vallabhbhai Patel को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल के उस ऐतिहासिक योगदान को याद किया, जिसने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को संभव बनाया और भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत विरासत, आध्यात्मिक निरंतरता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता के बाद जब देश नई पहचान गढ़ रहा था, तब सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। उनका सपना था कि यह मंदिर फिर से अपनी दिव्यता और भव्यता के साथ स्थापित हो और आने वाली पीढ़ियों को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का एहसास कराए।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि सरदार पटेल की दूरदृष्टि और दृढ़ इच्छाशक्ति ने मंदिर के पुनर्निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि सोमनाथ को फिर से जीवंत करना केवल एक मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं था, बल्कि यह भारत की आत्मा, आस्था और गौरव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल का विजन आज भी देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत हमेशा उनके सपनों और राष्ट्र निर्माण के विचारों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। पीएम ने यह भी कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की आध्यात्मिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण है, जो हर भारतीय को गर्व और प्रेरणा देता है।
अरब सागर के किनारे स्थित सोमनाथ मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। यह मंदिर कई विदेशी आक्रमणों और विनाश के बाद भी अपनी आस्था और पहचान बनाए रखने में सफल रहा। स्वतंत्र भारत में इसके पुनर्निर्माण का श्रेय काफी हद तक सरदार वल्लभभाई पटेल की सोच और नेतृत्व को दिया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी के इस संदेश के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सरदार पटेल और सोमनाथ मंदिर को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। बड़ी संख्या में लोगों ने “हर हर महादेव” और “भारत माता की जय” के नारों के साथ अपनी श्रद्धा प्रकट की। पीएम के इस भावुक संदेश ने एक बार फिर देश की सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपरा को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।