पश्चिम एशिया तनाव से शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निवेशकों के 6 लाख करोड़ डूबे

Mon 11-May-2026,03:16 PM IST +05:30

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पश्चिम एशिया तनाव से शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निवेशकों के 6 लाख करोड़ डूबे Indian Stock Market Update
  • सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा टूटा. 

  • पश्चिम एशिया तनाव से बाजार में भारी बिकवाली. 

  • निवेशकों के 6 लाख करोड़ रुपये डूबे. 

Maharashtra / Mumbai :

Mumbai / पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध खत्म होने की उम्मीदों को झटका लगने का असर अब वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि NIFTY 50 में भी करीब 300 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

सुबह करीब 9:40 बजे सेंसेक्स 1045.45 अंक यानी 1.35 फीसदी टूटकर 76,282.74 पर कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 288.30 अंक यानी 1.19 फीसदी की गिरावट के साथ 23,887.85 पर पहुंच गया। बाजार में इस तेज गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 6 लाख करोड़ रुपये घटकर 467 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

इस गिरावट का असर लगभग सभी सेक्टर्स में देखने को मिला। सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। सबसे ज्यादा गिरावट Titan Company के शेयरों में दर्ज हुई, जो 5 फीसदी से ज्यादा टूट गए। इसके अलावा इंडिगो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, State Bank of India, मारुति, भारती एयरटेल, लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट और अडानी पोर्ट्स जैसे बड़े शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।

हालांकि आईटी सेक्टर से थोड़ी राहत मिली, जहां HCLTech के शेयर मामूली बढ़त में रहे। वहीं Sun Pharmaceutical लगभग स्थिर कारोबार करता दिखा।

ब्रॉडर मार्केट्स की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.84 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.14 फीसदी तक गिर गया। सेक्टर के हिसाब से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो, मीडिया और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में इस बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव है। दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के युद्ध समाप्ति प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इससे यह संकेत मिला कि पिछले कई हफ्तों से जारी संघर्ष जल्दी खत्म नहीं होगा। इसी कारण वैश्विक बाजारों में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया।

इस तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि महंगे कच्चे तेल का असर महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर पड़ता है।

भारतीय रुपया भी दबाव में नजर आया। डॉलर के मुकाबले रुपया 0.4 फीसदी कमजोर होकर 94.88 पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.48 पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया का तनाव और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं और वैश्विक घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।