CBI निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल फिर बढ़ा, राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
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CBI Director Praveen Sood
प्रवीण सूद का CBI निदेशक के रूप में कार्यकाल बढ़ा.
राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया पर जताई आपत्ति.
पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद.
Delhi / Central Bureau of Investigation के निदेशक Praveen Sood का कार्यकाल केंद्र सरकार ने एक वर्ष के लिए और बढ़ा दिया है। यह उनके कार्यकाल का दूसरा विस्तार है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने चयन समिति की सिफारिश पर यह फैसला लिया। अब प्रवीण सूद 24 मई 2026 के बाद भी अगले एक साल तक सीबीआई प्रमुख बने रहेंगे।
प्रवीण सूद ने 25 मई 2023 को दो वर्ष के नियमित कार्यकाल के लिए सीबीआई निदेशक का पद संभाला था। पिछले साल भी उनके कार्यकाल में एक साल का विस्तार किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता वाली चयन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi भी शामिल थे।
हालांकि बैठक के बाद राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे “पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया” करार देते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को केवल औपचारिकता तक सीमित किया जा रहा है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे अपने असहमति पत्र को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि वह ऐसी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकते, जिसमें पारदर्शिता की कमी हो।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें उम्मीदवारों की “360-डिग्री रिपोर्ट” और स्व-मूल्यांकन दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। उनके मुताबिक, चयन समिति के सदस्य के रूप में यह जानकारी जरूरी थी ताकि उम्मीदवारों के कामकाज और प्रदर्शन का सही मूल्यांकन किया जा सके। उन्होंने कहा कि बार-बार लिखित अनुरोध करने के बावजूद उन्हें यह दस्तावेज नहीं दिए गए।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने सीबीआई जैसी प्रमुख जांच एजेंसी का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों के खिलाफ किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को चयन समिति में शामिल करने का मकसद ही यह था कि प्रक्रिया निष्पक्ष और संतुलित बनी रहे।
राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा कि “विपक्ष का नेता कोई रबर स्टाम्प नहीं है।” उन्होंने कहा कि अगर महत्वपूर्ण जानकारी ही साझा नहीं की जाएगी, तो पूरी चयन प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी। उन्होंने दावा किया कि सरकार पहले से तय उम्मीदवार को चुनने की दिशा में काम कर रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी राहुल गांधी चयन प्रक्रिया को लेकर असहमति जता चुके हैं। उन्होंने बताया कि मई 2025 और अक्टूबर 2025 में भी उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की मांग की थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।
अब प्रवीण सूद के कार्यकाल विस्तार के साथ राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इसे प्रशासनिक निरंतरता और अनुभव का लाभ बताकर सही ठहरा रही है, वहीं विपक्ष इसे संस्थाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता से जोड़कर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बना रह सकता है।