इस बीच राहत की बात यह है कि जहाज पर मौजूद दोनों भारतीय नागरिक फिलहाल स्वस्थ बताए गए हैं। स्पेन स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, दोनों भारतीय क्रू मेंबर थे और उनमें वायरस का कोई लक्षण नहीं पाया गया है। एहतियात के तौर पर उन्हें क्वारंटीन के लिए नीदरलैंड्स भेजा गया है, जहां उनकी स्वास्थ्य निगरानी जारी रहेगी।
WHO ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जहाज पर मौजूद सभी यात्रियों और क्रू सदस्यों को “हाई-रिस्क कॉन्टैक्ट” श्रेणी में रखा है। संगठन की महामारी एवं रोकथाम विभाग की निदेशक मारिया वैन केरखोव ने कहा कि जहाज पर मौजूद हर व्यक्ति की 42 दिनों तक निगरानी जरूरी होगी, चाहे उनमें फिलहाल बीमारी के लक्षण दिखाई दें या नहीं। उन्होंने बताया कि जहाज से पहले उतर चुके यात्रियों और कर्मचारियों की भी नियमित जांच और मेडिकल मॉनिटरिंग की जाएगी।
WHO की ‘डिजीज आउटब्रेक न्यूज़’ रिपोर्ट के मुताबिक, इस जहाज पर पहली बार 2 मई को गंभीर श्वसन संक्रमण के मामले सामने आए थे। उस समय जहाज पर कुल 147 यात्री और क्रू सदस्य मौजूद थे, जबकि 34 लोग पहले ही जहाज छोड़ चुके थे। अब तक कुल 8 लोगों में बीमारी के लक्षण मिले हैं, जिनमें से 6 मामलों में एंडीज स्ट्रेन वाले हंतावायरस की पुष्टि हो चुकी है। इस संक्रमण से अब तक तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले में पाया गया Andes strain एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक हंतावायरस है। हालांकि WHO ने साफ किया है कि यह वायरस आमतौर पर तेजी से नहीं फैलता और इंसान से इंसान में इसका संक्रमण बेहद सीमित परिस्थितियों में ही होता है। इसके लिए लंबे समय तक बेहद करीबी संपर्क जरूरी माना जाता है। फिलहाल WHO ने आम जनता के लिए खतरे का स्तर “लो रिस्क” यानी कम बताया है।
भारत में भी स्वास्थ्य एजेंसियां इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। National Centre for Disease Control, IDSP और स्वास्थ्य मंत्रालय WHO के साथ मिलकर यात्रियों की निगरानी और संक्रमण नियंत्रण से जुड़े इंतजाम कर रहे हैं।
हंतावायरस के लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, चक्कर, पेट दर्द, उल्टी और दस्त शामिल हैं। WHO ने सभी देशों को निर्देश दिया है कि संभावित संक्रमितों की पहचान, इलाज और संपर्क में आए लोगों की निगरानी तेजी से की जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है।