मऊ सड़क हादसा: कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी व पत्नी की मौत, इनोवा ट्रेलर से टकराई
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सड़क दुर्घटना में कुलपति और उनकी पत्नी का निधन.
रामटेक, नागपुर की दर्दनाक घटना से क्षेत्र में शोक.
शिक्षा जगत ने हरेराम तिवारी को दी श्रद्धांजलि.
Nagpur / मऊ जिले के दोहरीघाट थाना क्षेत्र में सोमवार देर रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के पूर्व कुलपति और वर्तमान में नागपुर स्थित कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, रामटेक (महाराष्ट्र) के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी (58 वर्ष) और उनकी पत्नी बादामी देवी की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि इनोवा कार के एयरबैग खुलने के बावजूद दोनों की जान नहीं बच सकी। इस घटना से शिक्षा जगत में शोक की लहर फैल गई है।
पुलिस के अनुसार यह दुर्घटना दोहरीघाट थाना क्षेत्र के बसारथपुर गांव के पास हुई। इनोवा कार अचानक सड़क किनारे खड़े पंचर ट्रेलर से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और वाहन का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
कार में मौजूद वैभव नामक युवक इस हादसे में घायल हुआ। उसने पुलिस को बताया कि वह प्रो. त्रिपाठी और उनकी पत्नी को नागपुर से गोपालगंज लेकर लौट रहा था। यात्रा के दौरान उसे नींद आने लगी, जिसके बाद प्रो. त्रिपाठी ने खुद गाड़ी चलाना शुरू किया। लेकिन दुर्भाग्यवश बसारथपुर के पास कार ट्रेलर से भिड़ गई।
इस दर्दनाक हादसे से न केवल मृतकों के परिवार बल्कि पूरे शिक्षा जगत में गहरा शोक व्याप्त है। प्रो. हरेराम त्रिपाठी एक विद्वान, कुशल प्रशासक और संस्कृत भाषा के प्रख्यात विद्वान थे। उनकी असामयिक मृत्यु से शिक्षा क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है।
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने X पर पोस्ट कर कहा:
"नागपुर स्थित कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी जी और उनकी धर्मपत्नी का आज सुबह उत्तर प्रदेश में एक दुखद सड़क हादसे में निधन हो गया, यह समाचार सुनकर अत्यंत दुख हुआ।
वे केवल कुलपति ही नहीं थे, बल्कि भारतीय दर्शन और न्यायशास्त्र के विद्वान के रूप में भी उनका नाम लिया जाता था। अनेक विषयों पर शोध करते हुए उन्होंने 40 से अधिक पुस्तकें लिखीं। उन्हें महर्षि बादरायण राष्ट्रपति पुरस्कार, शंकर वेदांत पुरस्कार, पाणिनी सम्मान सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।
संस्कृत की सेवा के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। इसी महीने की शुरुआत में कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में हम साथ थे। आज समय ने उन्हें हमसे छीन लिया, इस पर विश्वास करना कठिन है।
मैं उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
त्रिपाठी परिवार और कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय परिवार के दुख में हम सभी सहभागी हैं।