राष्ट्रपति मुर्मु ने IAS अधिकारियों को विकसित भारत 2047 का संदेश दिया

Mon 02-Mar-2026,05:24 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

राष्ट्रपति मुर्मु ने IAS अधिकारियों को विकसित भारत 2047 का संदेश दिया President-Murmu-IAS-Developed-India-2047-Message
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आईएएस अधिकारियों से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप पारदर्शी, समन्वित और उत्तरदायी प्रशासन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

  • समावेशी विकास, जलवायु लचीलापन और हरित शासन को प्राथमिकता देने पर जोर, ताकि अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचे।

Delhi / New Delhi :

Delhi/ राष्ट्र निर्माण में प्रशासनिक नेतृत्व की भूमिका को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों से विकसित भारत 2047 की दृष्टि के अनुरूप कार्य करने का आह्वान किया। राज्य सिविल सेवाओं से पदोन्नत होकर आईएएस बने अधिकारी, जो 128वें प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं, ने आज राष्ट्रपति भवन में उनसे मुलाकात की। राष्ट्रपति ने उन्हें व्यापक दृष्टिकोण, समन्वय और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखने का संदेश दिया।

राष्ट्रपति ने कहा कि अब इन अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल जिला या राज्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पूरे राष्ट्र के शासन मानकों के संरक्षक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक सीमाओं से परे सोचने और विभागीय बाधाओं को दूर कर सहयोगात्मक कार्य संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता है। संस्थागत सामंजस्य और बेहतर समन्वय से ही शासन तंत्र को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि लोक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखना और विकासात्मक परिणामों को तेज करना इन अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उनके प्रत्येक निर्णय में ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना झलकनी चाहिए और वह 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे जनता की आकांक्षाओं और जरूरतों को समझते हुए नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अनुभव और समर्पण उन्हें जटिल चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएगा।

समावेशी विकास पर बल देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी सार्थक होगा जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि कोई भी समुदाय भौगोलिक, सामाजिक या आर्थिक कारणों से पीछे न छूटे।

साथ ही उन्होंने स्थिरता और जलवायु लचीलापन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। वरिष्ठ प्रशासकों के रूप में हरित प्रथाओं को बढ़ावा देना, जलवायु-अनुकूल शासन अपनाना और सतत विकास को प्रोत्साहित करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि आज लिए गए निर्णय और प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देंगे।