परिसीमन विधेयक से बदल सकता है छत्तीसगढ़ का चुनावी नक्शा और सीटें
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केंद्र सरकार लोकसभा में परिसीमन आयोग गठन का विधेयक ला सकती है, जिससे 50 साल बाद सीटों में बड़ा बदलाव संभव होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक से परिसीमन प्रक्रिया तेज होगी और राजनीतिक समीकरण व क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पूरी तरह बदल सकता है।
छत्तीसगढ़ में लोकसभा सीटें 11 से बढ़कर 15–17 और विधानसभा सीटें 90 से बढ़कर 125–135 तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
Raipur/ केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन आयोग के गठन के बाद देश की चुनावी संरचना में बड़ा बदलाव संभावित है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है, जिससे राज्यों में लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण होगा। छत्तीसगढ़ में इसका सबसे बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है, जहां लंबे समय से सीटों की संख्या स्थिर बनी हुई है।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा और 11 लोकसभा सीटें हैं, लेकिन प्रस्तावित परिसीमन के बाद इनमें उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। अनुमान है कि लोकसभा सीटें 15 से 17 तक पहुंच सकती हैं, जबकि विधानसभा सीटें 125 से 135 के बीच हो सकती हैं। यह बदलाव जनसंख्या वृद्धि और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
राज्य में सीटों के इतिहास पर नजर डालें तो 1952 में 82 विधानसभा सीटें थीं, जो 1957 में घटकर 81 रह गईं। 1967 में यह संख्या बढ़कर 84 हुई और 1972 के बाद से 90 सीटें स्थिर हैं। 2002 के परिसीमन आयोग ने केवल सीमाओं और नामों में बदलाव किया था, लेकिन सीटों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं की गई थी।
परिसीमन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था होती है, जो जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं और सीटों की संख्या निर्धारित करती है। भारत में अब तक चार बार परिसीमन आयोग का गठन हो चुका है, और हर बार इसका उद्देश्य प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित बनाना रहा है।
पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त और सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. सुशील त्रिवेदी के अनुसार, पहले परिसीमन प्रक्रिया में 6–7 साल लग जाते थे, लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक के कारण यह प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सकती है।
संभावित परिसीमन से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और नए क्षेत्रों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा। इससे चुनावी रणनीतियों में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। यह कदम न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की लोकतांत्रिक संरचना को नया आकार दे सकता है।