महिला आरक्षण बिल पर संसद में घमासान, 33% को लेकर बड़ा विवाद शुरू
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केंद्र सरकार संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026’ पेश करेगी, जिसमें लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रस्ताव है।
प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 850 तक हो सकती हैं, जिसमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होने की संभावना है।
विपक्ष ने परिसीमन और समय-सीमा पर सवाल उठाए, जबकि सरकार इसे महिला सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम बता रही है।
RAIPUR/ संसद के विशेष सत्र की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार इस सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026’ को सदन में पेश करने जा रही है, जिसे महिला राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
इस प्रस्तावित विधेयक के लागू होने पर लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। सरकार का दावा है कि इससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक समावेशी बनेगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह आरक्षण वर्ष 2029 से लागू करने की योजना है। इसके तहत महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में एक-तिहाई हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाएगी। इससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
इसी बीच लोकसभा सीटों के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी चर्चा में है, जिसमें सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 तक करने की बात कही जा रही है। इसमें महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित होने का प्रावधान भी शामिल है। सीटों के अंतिम निर्धारण के लिए परिसीमन प्रक्रिया लागू की जाएगी, जिससे राज्यों के राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
हालांकि इस विधेयक को लेकर राजनीतिक विवाद भी गहरा गया है। कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने इसे चुनावी स्टंट बताया है, जबकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे सत्ता संतुलन बदलने की कोशिश करार दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इसकी समय-सीमा और प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।
विपक्षी दलों ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में बैठक कर संयुक्त रणनीति बनाने की तैयारी की है, जिससे संसद में तीखी बहस की संभावना है।
वहीं, भाजपा नेताओं ने इस बिल को ऐतिहासिक बताया है। मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि यह महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक अधिकार देगा, जबकि अनुराग ठाकुर ने विपक्ष पर महिला सशक्तिकरण के विरोध का आरोप लगाया है।
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनसंख्या आधारित सीट निर्धारण से कुछ राज्यों को नुकसान हो सकता है।
उद्यमी कल्पना सरोज सहित कई सामाजिक संगठनों ने इस विधेयक का स्वागत किया है और इसे महिलाओं के लिए नई संभावनाओं का द्वार बताया है। अब सभी की नजरें संसद में होने वाली बहस और अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जो देश की राजनीतिक दिशा को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।