स्मार्ट मीटर पर राहत: अब प्रीपैड अनिवार्य नहीं, उपभोक्ता को विकल्प

Wed 08-Apr-2026,04:36 PM IST +05:30

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स्मार्ट मीटर पर राहत: अब प्रीपैड अनिवार्य नहीं, उपभोक्ता को विकल्प Smart-Meter-Prepaid-Not-Mandatory-India
  • केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं पर प्रीपैड कनेक्शन थोपे नहीं जाएंगे, उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प मिलेगा।

  • छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में स्मार्ट मीटर तेजी से लगाए जा रहे हैं, लेकिन प्रीपैड अनिवार्यता को लेकर फैली आशंकाएं अब खत्म हो गई हैं।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ देशभर के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। स्मार्ट मीटर को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति अब काफी हद तक साफ हो गई है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद किसी भी उपभोक्ता को जबरन प्रीपैड कनेक्शन लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपैड या पोस्टपैड विकल्प चुन सकेंगे, जिससे उन्हें अधिक स्वतंत्रता और नियंत्रण मिलेगा।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में इस विषय पर स्पष्ट बयान देते हुए कहा कि प्रीपैड प्रणाली को अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह उपभोक्ता की पसंद पर निर्भर करेगा कि वे किस प्रकार का बिलिंग सिस्टम अपनाना चाहते हैं।

देशभर में स्मार्ट मीटर योजना के तहत तेजी से पुराने मीटर बदले जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी इस योजना का व्यापक स्तर पर क्रियान्वयन हो रहा है। यहां लगभग 60 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बदलने का लक्ष्य है, जिनमें से 35 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर पहले ही लगाए जा चुके हैं।

शुरुआत में यह आशंका जताई जा रही थी कि स्मार्ट मीटर के साथ सभी कनेक्शन प्रीपैड कर दिए जाएंगे, जिससे उपभोक्ताओं को पहले रिचार्ज करना पड़ेगा। इस संभावना को लेकर कई जगहों पर विरोध भी देखा गया था।

कानूनी पहलू को लेकर भी बहस हुई थी। उपभोक्ता संगठनों ने दावा किया था कि प्रीपैड व्यवस्था को अनिवार्य बनाना विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अनुरूप नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक विकल्प होगा।

हालांकि, सरकारी विभागों के कनेक्शनों को प्रीपैड में बदलने की योजना पर काम जारी है। ब्लॉक स्तर के हजारों कनेक्शनों को प्रीपेड करने की प्रक्रिया फिलहाल जारी रहेगी।

इस फैसले से उपभोक्ताओं को कई फायदे मिलेंगे। वे अपनी जरूरत और बजट के अनुसार बिजली उपयोग कर सकेंगे। प्रीपैड में खर्च पर नियंत्रण रहेगा, जबकि पोस्टपैड में पहले उपयोग और बाद में भुगतान की सुविधा मिलेगी।