मथुरा, संभल और हाथरस में ओलावृष्टि ने हालात और भी बिगाड़ दिए। जालौन में तो 24 घंटे के भीतर दूसरी बार ओले गिरे, जिससे खेतों और सड़कों पर बर्फ की चादर जैसी स्थिति बन गई। गेहूं और सरसों की तैयार फसलें बुरी तरह बर्बाद हो गईं। कई किसानों के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं था। एक किसान अपनी तबाह फसल को देखकर खेत में ही बैठ गया और बेबसी में बोला, “सब खत्म हो गया… अब क्या खाएंगे?”
कानपुर में तेज आंधी ने भारी तबाही मचाई। 200 से ज्यादा पेड़ और बिजली के पोल गिर गए। एक चलती ऑटो पर बरगद का पेड़ गिरने से ड्राइवर और एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। वहीं सीतापुर में बिजली गिरने से घर में आग लग गई, जिसमें मां-बेटी जिंदा जल गईं। सिद्धार्थनगर में खराब मौसम के बीच एक बोलेरो नहर में गिर गई, जिसमें एक महिला और 5 महीने के मासूम की जान चली गई, जबकि 7 लोग घायल हो गए।
हरदोई में आंधी-बारिश के दौरान एक मकान की दीवार गिरने से 7 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बहराइच में तेज हवाओं के कारण BSNL का टावर गिर गया। बाराबंकी और जालौन में कई गांवों में फसलें तबाह हो गईं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। संभल और प्रयागराज जैसे जिलों में भी ओलावृष्टि और तेज हवाओं का असर साफ देखा गया।
मौसम विभाग के अनुसार, यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल एक-दो दिन मौसम साफ रह सकता है, लेकिन 7 अप्रैल से फिर से आंधी और बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। तापमान में 3 से 5 डिग्री तक गिरावट भी दर्ज की जा सकती है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि किसानों के नुकसान की भरपाई में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और 24 घंटे के भीतर मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा ने लोगों, खासकर किसानों को गहरी चिंता में डाल दिया है।