PLI योजना से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र मजबूत, निवेश 9200 करोड़ पार

Tue 07-Apr-2026,06:20 PM IST +05:30

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PLI योजना से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र मजबूत, निवेश 9200 करोड़ पार PLI-Food-Processing-India-Investment-Growth
  • बाजरा आधारित उत्पादों को बढ़ावा देकर मूल्यवर्धन, किसानों की आय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय खाद्य उत्पादों की मांग में तेजी आई है।

  • योजना से MSME और बड़ी कंपनियों को समान अवसर मिला, जिससे उत्पादन, निर्यात और भारतीय ब्रांडों की वैश्विक पहचान को मजबूती मिली है।

Delhi / Delhi :

Delhi/ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई Production Linked Incentive Scheme (PLI) योजना देश के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला रही है। वित्त वर्ष 2021-22 से 2026-27 तक लागू इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 10,900 करोड़ रुपये है, जिसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना, मूल्यवर्धन करना और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना है।

यह योजना विशेष रूप से रेडी-टू-कुक (RTC), रेडी-टू-ईट (RTE) खाद्य उत्पाद, प्रसंस्कृत फल-सब्जियां, समुद्री उत्पाद और मोजरेला चीज जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देती है। इसके साथ ही लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को नवाचार और जैविक उत्पादों के लिए भी सहायता प्रदान की जा रही है।

Ministry of Food Processing Industries के अनुसार, इस योजना के तहत 128 कंपनियों और 274 इकाइयों को मंजूरी दी गई है। इनमें 68 MSME आवेदक और 40 कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां शामिल हैं, जो इस योजना के समावेशी स्वरूप को दर्शाती हैं।

निवेश के आंकड़े इस योजना की सफलता को स्पष्ट करते हैं। निर्धारित 7,722 करोड़ रुपये के मुकाबले 22 राज्यों में कुल 9,207 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इसके परिणामस्वरूप देश में प्रसंस्करण और संरक्षण क्षमता में प्रति वर्ष लगभग 34 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है।

रोजगार के मोर्चे पर भी यह योजना प्रभावी रही है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 3.29 लाख लोगों को रोजगार मिला है, जिससे ग्रामीण और गैर-कृषि क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।

इसके अलावा, पीएलआई उत्पादों की बिक्री में 10.58 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) और निर्यात में 7.41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे भारतीय खाद्य उत्पादों की वैश्विक मांग में बढ़ोतरी का संकेत मिलता है।

International Year of Millets 2023 के मद्देनजर बाजरा आधारित उत्पादों को भी विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। बाजरा उत्पादों की बिक्री वित्त वर्ष 2022-23 में 345.73 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1845.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जबकि इसकी खरीद में भी 15 गुना वृद्धि हुई है।

यह योजना न केवल उत्पादन और निर्यात बढ़ा रही है, बल्कि भारतीय ब्रांडों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने में भी मदद कर रही है। ब्रांडिंग और मार्केटिंग के तहत कंपनियों को विदेशों में स्टोर ब्रांडिंग, शेल्फ स्पेस और प्रचार के लिए समर्थन दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन बढ़ाने, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

कुल मिलाकर, PLI योजना भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने, रोजगार सृजन बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में एक परिवर्तनकारी पहल साबित हो रही है।