आर्टेमिस II ने चंद्र यात्रा का दो-तिहाई सफर पूरा कर रचा इतिहास
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Artemis II Mission Update 2026
आर्टेमिस II मिशन ने चंद्रमा यात्रा का दो-तिहाई हिस्सा पूरा कर मानव अंतरिक्ष इतिहास में नई उपलब्धि दर्ज की।
1972 के बाद पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन, अपोलो 13 का दूरी रिकॉर्ड तोड़ने की ओर अग्रसर।
विविधता से भरा दल, जिसमें पहली महिला और पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री भी शामिल, बना मिशन को ऐतिहासिक।
नई दिल्ली/ मानव अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जब नासा का Artemis II मिशन चंद्रमा की यात्रा का दो-तिहाई हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है। यह मिशन 1972 के बाद पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन है, जिसने न केवल वैज्ञानिक जगत में उत्साह बढ़ाया है, बल्कि भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए नई संभावनाएं भी खोली हैं।
नासा के अनुसार, यह उपलब्धि मिशन के चौथे फ्लाइट डे के दौरान हासिल हुई। अंतरिक्ष यात्री इस समय चंद्रमा के करीब पहुंचते हुए उसके ‘फार साइड’ यानी पीछे वाले हिस्से के अध्ययन की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान वे स्पेसक्राफ्ट को मैन्युअली नियंत्रित करने का अभ्यास भी कर रहे हैं, जो भविष्य के मिशनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मिशन पर सवार अंतरिक्ष यात्रियों में रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। इस मिशन की खास बात यह है कि यह विविधता और प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी ऐतिहासिक है—जहां विक्टर ग्लोवर चंद्रमा की ओर जाने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री हैं, वहीं क्रिस्टीना कोच इस मिशन में शामिल पहली महिला अंतरिक्ष यात्री हैं।
यह मिशन कुल मिलाकर लगभग 2,52,000 मील (करीब 4 लाख किलोमीटर) की दूरी तय करेगा, जो Apollo 13 के रिकॉर्ड को पार करने की दिशा में है। हालांकि, यह स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश नहीं करेगा, बल्कि उसके चारों ओर से फ्लाईबाय करते हुए पृथ्वी की ओर वापस लौटेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिशन Apollo 17 के बाद पहला मानवयुक्त चंद्र अभियान है, जो भविष्य के चंद्र मिशनों की नींव तैयार कर रहा है। मिशन का समापन 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के साथ होगा।
नासा की दीर्घकालिक योजना के तहत यह मिशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। एजेंसी का लक्ष्य 2028 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मानव को उतारना और भविष्य में वहां स्थायी बेस स्थापित करना है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आर्टेमिस II न केवल तकनीकी परीक्षणों के लिए अहम है, बल्कि यह मानव जाति के अंतरिक्ष में विस्तार के सपनों को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम भी है।