ग्रेट इंडियन बस्टर्ड प्रोजेक्ट में सफलता, कैप्टिव सेंटर में दो चूजे जन्मे
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प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम में राजस्थान केंद्र पर दो नए चूजों के जन्म से पक्षियों की कुल संख्या बढ़कर 70 हो गई।
सरकार अब कैप्टिव ब्रीडिंग में पाले गए कुछ चूजों को धीरे-धीरे प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी कर रही है, जिससे प्रजाति संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।
Delhi/ दुर्लभ और विलुप्तप्राय पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण के लिए चल रही परियोजना को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ का कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम अब अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। राजस्थान के संरक्षण प्रजनन केंद्र में इस सप्ताह दो नए चूजों के जन्म के साथ कैप्टिव अवस्था में पाले जा रहे पक्षियों की कुल संख्या बढ़कर 70 हो गई है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए इसे संरक्षण प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस सप्ताह राजस्थान स्थित कैप्टिव ब्रीडिंग केंद्र में दो चूजों का जन्म हुआ है, जिनमें से एक प्राकृतिक प्रजनन से और दूसरा कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के माध्यम से पैदा हुआ है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नेतृत्व में देश जैव विविधता संरक्षण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ‘प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ भी उसी प्रयास का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इस अत्यंत संकटग्रस्त पक्षी प्रजाति को विलुप्त होने से बचाना है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत के सबसे दुर्लभ पक्षियों में से एक माना जाता है और यह मुख्य रूप से राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में आवास क्षेत्र में कमी, बिजली लाइनों से टकराव और अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण इसकी संख्या तेजी से घट गई थी।
इसी चुनौती को देखते हुए सरकार ने संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम शुरू किया, जिसके तहत नियंत्रित वातावरण में इन पक्षियों का प्रजनन कराया जा रहा है। अब इस कार्यक्रम के चौथे वर्ष में प्रवेश करने के साथ इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।
भूपेंद्र यादव ने बताया कि इस वर्ष पाले गए कुछ चूजों को धीरे-धीरे जंगल में छोड़ा जाएगा। यह प्रक्रिया बेहद सावधानी और वैज्ञानिक पद्धति के साथ की जाएगी, ताकि पक्षी प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रह सकें और उनकी संख्या में वृद्धि हो सके।
उन्होंने इस सफलता के लिए राजस्थान वन विभाग के अधिकारियों और संरक्षण टीम की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह संरक्षण प्रयास जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।